संगठन की कमान हाथों में आने के बाद से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अब तक रहे दूसरे अध्यक्षों को खुद से अलग दिखाने के अभियान पर हैं। अपने अभी तक के कार्यकाल में उन्होंने संगठन में जान फूंकने के लिए कई प्रयोग किए। लेकिन उनके नाम की तरह ही ये प्रयोग भी अब तक किशोरावस्था में हैं।
अब जबकि विधानसभा चुनाव की चुनौती उनके सामने है, प्रत्येक दावेदार के सामने उन्होंने एक और शर्त लगा दी है कि उसे सात किमी पदयात्रा करने के बाद ही टिकट की उम्मीद करनी होगी। मगर असल सवाल यही है, क्या उनके ये प्रयोग कांग्रेस को सत्ता में वापसी करा पाएंगे? बकौल किशोर उनके ये प्रयोग चुनाव में निश्चित तौर पर मददगार साबित होंगे।
प्रदेश की राजनीति में किशोर उपाध्याय अपने राजनीतिक गुरू हरीश रावत से नाराजगी को लेकर ही चर्चाओं में नहीं हैं। संगठन स्तर पर अलग-अलग प्रयोगों को लेकर भी वह ध्यान खींचते आये हैं। इन्हें लेकर वे संगठन के भीतर और बाहर दोनों ही जगह आलोचनाओं के निशाने पर भी रहे। वर्ष 2014 में जब उन्होंने संगठन की कमान थामी तो यही माना गया कि सरकार के साथ अब पार्टी पर भी मुख्यमंत्री का पूरा कंट्रोल हो जाएगा।
सीएम के वफादारों में होती रही गिनती पर बढ़ी खटास
किशोर उपाध्याय और हरीश रावत
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ऐसा इसलिए माना गया क्योंकि किशोर की गिनती मुख्यमंत्री के वफादारों में होती रही है। मगर समय के साथ-साथ गुरू और चेले के रिश्तों में खटास बढ़ती गई। हालांकि सियासी हलकों में इसे दोनों नेताओं के बीच नूराकुश्ती की मिसाल दी गई। बहरहाल, कमान संभालने के बाद से किशोर ने संगठन में लगातार नये-नये प्रयोग किए। जिला इकाइयां 13 से 29 कर दी।
ब्लॉक इकाइयों को 160 से 274 तक बढ़ा दिया। 63 विधानसभाओं में ग्राम, बाजार व मतदाताओं केंद्र कांग्रेस की स्थापना कर दी। समाज कई वर्गों को उन्होंने कांग्रेस से जोड़ने का प्रयोग किया।
हालांकि उन पर नेताओं की फौज खड़ी करने का आरोप लगा। उन्होंनेहर धर्म के उत्सव, हर महापुरुष के जयंती व पुण्य तिथि कार्यक्रम कराने का रिवाज डाला। सीएम को चिट्ठी भेजने का तो उन्होंने रिकॉर्ड ही बना दिया। ये चिट्ठियां सरकार और संगठन के रिश्तों में तड़के का काम करती रहीं।
किशोर उपाध्याय (पगड़ी में)
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भाजपा की परिवर्तन यात्रा के जवाब में सतत विकास संकल्प यात्रा निकाली और अब जनआशीष यात्राएं निकालने की तैयारी में हैं। प्रयोगों का ये सिलसिला अनवरत जारी है। उन्होंने टिकट के दावेदारों को सात किमी की पदयात्रा का हुक्म सुनाया है। उनके ताजा हुक्म को लेकर दावेदारों में खासे बेचैनी है।
शुरुआत से ही पार्टी के भीतर और बाहर किशोर के ऐसे प्रयोगों पर यह कहकर सवाल उठते रहे हैं कि ये राजधानी मुख्यालय और कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों तक सीमित रहे हैं।
इनका प्रभाव जिलों व ब्लॉकों में नहीं दिखाई देता। पर किशोर इससे सहमत नहीं। वह मानते हैं कि उनके प्रयोगों की असल परीक्षा विधानसभा चुनाव में होगी। वह कहते हैं, चुनाव में उनके प्रयोग निश्चिततौर पर मददगार साबित होंगे। समाज का हर वर्ग उनके साथ जुड़ा है।