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रेल रोको आंदोलन: रुड़की में डेढ़ घंटे रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान, देहरादून से 40 मिनट देरी से रवाना हुई लिंक एक्सप्रेस

Fri, 19 Feb 2021 12:04 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
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रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के क्रम में उत्तराखंड में गुरुवार को जगह-जगह रेल का चक्का जाम किया गया।

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कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संगठनों ने रुड़की रेलवे स्टेशन पर रेल का चक्का जमा किया। किसानों का कार्यक्रम चार घंटे तक रेलवे ट्रैक पर डटे रहने का था, लेकिन चमोली में आई आपदा के चलते करीब डेढ़ घंटे बाद एएसडीएम को ज्ञापन सौंपकर किसान लौट गए। इससे पहले किसान नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे हमले बोलते हुए प्रदर्शन किया।

गुरुवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), उत्तराखंड किसान मोर्चा, राष्ट्रीय किसान-मजदूर संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता दोपहर करीब 12.30 बजे रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। यहां पहले से ही मौजूद भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगा दी थी। किसानों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया तो पुलिस के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई।
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किसान नारेबाजी करते हुए पुलिस का घेरा तोड़कर रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ गए और रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इस दौरान भाकियू (टिकैत) के गढ़वाल मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, उकिमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड़, भाकियू (टिकैत) के जिला प्रवक्ता राकेश लोहान, किसान-मजदूर संगठन के पद्म सिंह भाटी और विकास सैनी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कोरोना काल में गुपचुप तरीके से किसान विरोधी तीन कानून लाई है। 

इसके विरोध में तीन महीने से देश का किसान दिल्ली की सड़कों पर है और केंद्र सरकार हर वक्त साजिश रच रही है कि किस तरीके से किसानों के आंदोलन को बदनाम किया जाए। किसान केंद्र की साजिश को समझ चुका है और जब तक कानून वापस नहीं होते, पीछे नहीं हटेगा। इस दौरान किसानों ने चमोली जिले में आई आपदा में मारे गए लोगों के लिए दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

इसके बाद एएसडीएम पूरण सिंह राणा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर धरना समाप्त कर दिया गया। रुड़की से सहारनपुर के बीच बलियाखेड़ी में भी किसानों ने रेलवे ट्रैक जाम किया था। लिहाजा सहारनपुर से हरिद्वार आ रही श्री गंगानगर एक्सप्रेस को आधे घंटे के लिए रोकना पड़ा।

ये रहे मौजूद

रवि कुमार, मास्टर कंवरपाल, सुक्रमपाल, धर्मेंद्र, बबलू राठी, ऋषिपाल, उमेश प्रधान, मोहम्मद आजम, सुरेंद्र लंबरदार, आकिब हसन, रविंद्र त्यागी, दीपक पुंडीर, दुष्यंत कुमार, नरेंद्र कुमार, सुधीर, मोनू, ज्ञानचंद, वीरेंद्र सैनी, धर्मेंद्र कुमार, राजकुमार, सतवीर सिंह, ओमकार आदि।

कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है: हरीश

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कहा कि किसान हित के सारे फैसले कांग्रेस ने ही लिए हैं। दिल्ली और देहरादून की सरकार उन निर्णयों को बदल रही है। कांग्रेस किसानों के साथ पूरी शिद्दत से खड़ी है। 

रामपुर रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में पत्रकारों से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि राजनीतिक दल होने के नाते कांग्रेस की किसानों के साथ एकात्मकता रही है। चमोली आपदा पर उन्होंने कहा कि समन्वय के अभाव में मशीनों की व्यवस्था समय पर नहीं हुई और ले आउट प्लान आपदा क्षेत्र में उपलब्ध न होने से अन्य कारणों से बचाव व राहत कार्य में विलंब हुआ। इसके चलते उत्तराखंड की साख गिरी है और आगे के लिए सोचना होगा। 

उन्होंने कहा कि मोदी फैक्टर चुनाव में हावी न हो इसलिए आवश्यक है कि भाजपा के स्थानीय चेहरे के खिलाफ कांग्रेस भी अपना स्थानीय चेहरा आगे करे। मेरा सवाल सैद्धांतिक है और पार्टी उस पर आज नहीं तो कल अमल करेगी।

कांग्रेस को भाजपा की मोदी रणनीति से मुकाबला करने के लिए स्थानीय मुद्दे को आगे लाना होगा और स्थानीय मुद्दे तभी आगे आ पाएंगे जब स्थानीय चेहरा होगा। वह भी तो कांग्रेस का कद्दावर चेहरा हैं के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी समझ से बात यही पर गड़बड़ा रही है। 
 
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देहरादून से 40 मिनट देरी से रवाना हुई लिंक एक्सप्रेस

कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों की ओर से आयोजित रेल रोको आंदोलन का असर देहरादून से संचालित ट्रेनों पर भी पड़ा। किसानों की ओर से डोईवाला रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन के चलते देहरादून से प्रयागराज जाने वाली लिंक एक्सप्रेस को 40 मिनट देरी से रवाना किया गया। वहीं, शताब्दी एक्सप्रेस को भी कांसरो स्टेशन पर 15 मिनट तक रोका। 

स्टेशन अधीक्षक (परिचालन) सीताराम शंकर ने बताया कि देहरादून-प्रयागराज लिंक एक्सप्रेस, नई दिल्ली- देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस के अलावा किसी अन्य ट्रेन के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा। किसानों के आंदोलन के चलते रेलवे सुरक्षा बल के साथ में जीआरपी को सतर्क रखा गया था। सभी स्टेशनों पर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। 

किसानों ने रेलवे ट्रैक पर दिया धरना

ऊधमसिंह नगर के बाजपुर में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने रेलवे ट्रैक पर सांकेतिक धरना दिया। किसानों ने कहा कि यदि सरकार अपनी जिद पर अड़ी है तो हम भी कृषि कानूनों को खारिज कराने की मांग पर अडिग हैं। इस दौरान किसानों ने केंद्र सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।

बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे घोषित कार्यक्रम के अनुसार, भाकियू प्रदेशाध्यक्ष करम सिंह पड्डा की अगुवाई में किसान बाजपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। यहां प्रदर्शन और नारेबाजी कर किसान रेलवे ट्रैक पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। धरना शाम चार बजे समाप्त हुआ। इस दौरान भाकियू प्रदेशाध्यक्ष पड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर कर दिया है। यदि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने पर अड़ी है तो हम भी कानूनों को खारिज कराने के लिए अडिग है।

इस दौरान आरपीएफ के निरीक्षक ओपी मीणा ने धरना दे रहे किसानों को समझाने की कोशिश की लेकिन किसानों ने शांतिपूर्वक आंदोलन करने की बात कही। इधर, स्टेशन मास्टर जेपी कश्मीरी ने बताया कि शांतिपूर्वक आंदोलन किया गया है फिर भी उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा की दृष्टि से आरपीएफ, पीएसी और पुलिस बल मुस्तैद रहा।

उन्होंने बताया कि कोरोना काल से ही ट्रेनों का आवागमन बंद है, लिहाजा कोई ट्रेन प्रभावित नहीं हुई। बताया कि यदि सामान्य दिनों में यह धरना-प्रदर्शन होता तो दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक संबंधित ट्रैक से पांच ट्रेनें गुजरतीं।

इधर, ट्रेन रोको आंदोलन के मद्देनजर पुलिस महकमा अलर्ट रहा। यूपी सीमा के मझोला रेलवे स्टेशन और उसके समीपवर्ती संवेदनशील स्थानों पर पुलिस गश्त पर रही। चौकी प्रभारी मझोला कमलेश कुमार की देखरेख में उत्तराखंड की सीमा से लगे सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस फ्लैग मार्च करती रही।
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