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लोगों की किडनी बेचकर ये शख्स बनाता है सी ग्रेड फिल्म, आगे की कहानी पढ़ेंगे तो हिल जाएंगे

Tue, 12 Sep 2017 11:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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किडनी के काले धंधे से देश को हिलाने वाले डॉ.अमित राउत अपने धंधे से कमाए पैसों का इस्तेमाल सी ग्रेड फ‌िल्में बनाने में करता है। सूत्रों के मुताबिक किडनी माफिया अमित का पहली पत्नी सुनीता से तलाक हो चुका है।
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इसके बाद उसने दूसरी शादी की और इसके बाद पूनम नाम की महिला से तीसरी शादी कर ली, जिसके दो बच्चे हैं और कनाडा में रहते हैं। अमित को ग्लैमरस जिंदगी पसंद है। वह पहले कई सी ग्रेड की फिल्मों में पैसा इनवेस्ट कर चुका है। सूत्रों के मुताबिक अमित का एक भाई प्रोडक्शन कंपनी भी चलाता था। 

डॉ अम‌ित का यह धंधा देश के गरीब और जरूरतमंदों की किडनी दुनिया के 10 देशों में बेचने का है। मार्च 2013 में सीबीआई की विशेष अदालत से गुरुग्राम में किडनी रैकेट मामले में सात साल की सजा पा चुके डॉ.अमित को ही दून पुलिस इस रैकेट का भी मास्टरमाइंड बता रही है। हैरत की बात यह है कि अवैध किडनी प्रत्यारोपण के मामले में 2013 से पहले भी तीन बार अमित पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है।
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डॉ.अमित का कारोबार अमेरिका, ग्रीस, कनाडा, दुबई, नेपाल, इंग्लैंड, जापान, फ्रांस, सऊदी अरब और ईरान तक फैला है। वह मोटे पैसे लेकर इन देशों के बीमार लोगों को किडनी लगाता है। जनवरी 2008 में डॉ.अमित उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब हरियाणा के गुरुग्राम में हरियाणा पुलिस और उत्तरप्रदेश पुलिस ने उसके गेस्ट हाउस में रेड मारी थी। वहां छह साल से अवैध क्लिनिक चल रहा था। 

130 किडनी की एडवांस बुकिंग

सात फरवरी 2008 को डॉ.अमित को पुलिस ने नेपाल से गिरफ्तार किया था। बाद में मामला सीबीआई के पास गया। मार्च 2013 में सीबीआई की विशेष अदालत ने डॉ.अमित, डॉ.उपेंद्र सहित पांच लोगों को दोषी मानते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। साथ ही 60-60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

​पुलिस के मुताबिक डॉ.अमित जमान पर बाहर आकर फिर किडनी के अवैध धंधे में लग गया। इस बार उसने देहरादून को अपना ठिकाना बनाया। 2008 में जब गुरुग्राम किडनी मामले में डॉ.अमित पकड़ा गया था तो पता चला था कि उस वक्त गैंग के पास 130 किडनी की एडवांस बुकिंग थी। इनमें ज्यादातर विदेशी ग्राहक थे।

अब एजेंटों पर पुलिस की नजर
डॉ.अमित अपने काम को अंजाम देने के लिए हर शहर में एजेंट तैयार करता है। इन एजेंटों को प्रति किडनी के हिसाब से कमीशन दिया जाता है। पुराने मामलों में भी यह बात सामने आ चुकी है कि डॉ.अमित ने देश-विदेश में अपने 500 एजेंट बना रखे थे। इस बार भी पुलिस की तफ्तीश इस ओर बढ़ गई है कि डॉ.अमित ने किस राज्य में कितने एजेंट बनाए हैं, जो कि उसे देहरादून तक किडनी डोनर उपलब्ध कराते थे। 
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उत्तराखंड अमित का पांचवां निशाना

छोटे से चीरे का देता है भरोसा
किडनी निकालने के लिए डॉ.अमित और उसका गैंग जरूरतमंद लोगों को केवल एक छोटे से चीरे का भरोसा देता है। उन्हें बाकायदा यह समझाया जाता है कि कुछ देर का ऑपरेशन है। इसके बाद एक किडनी के साथ वह आसानी से अपनी जिंदगी जी सकते हैं। बताता है कि छोटे से चीरे की वजह से उन्हें कोई दर्द भी नहीं होगा। 

झोलाछाप डॉक्टरों पर भी शक
पुलिस को अब आसपास के क्षेत्रों के झोलाछाप डॉक्टरों पर भी शक है। पहले भी ऐसे डॉक्टरों की मदद से ही अमित अपना धंधा चलाता रहा है। ऐसे में पुलिस की जांच की सुई अब इस ओर भी घूम रही है।

उत्तराखंड अमित का पांचवां निशाना
किडनी माफिया अमित का उत्तराखंड पांचवां निशाना है। इससे पहले वह चार राज्यों में पकड़ा जा चुका है। आखिरी बार वह हरियाणा के गुरुग्राम में बड़े किडनी रैकेट के खुलासे के बाद गिरफ्त में आया था, जिसमें उसे सात साल की सजा हुई थी। इससे पहले वह आंध्र प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी अवैध मानव अंग प्रत्यारोपण के आरोप में गिरफ्तार हुआ था, लेकिन जमानत पर छूट गया था।
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