मौके से पकड़े गए कुछ लोगों ने पुलिस को बताया था कि उन्हें कोलकाता के हावड़ा इलाके में रहने वाली चांदना गुड़िया नाम की महिला ने यहां भेजा था। इसके बाद पुलिस चांदना की तलाश में जुट गई थी। पुलिस के अनुसार लोगों के पास न तो उसका कोई फोटो था और न कोई मोबाइल नंबर।
जिसके कारण उसे तलाशने में काफी परेशानी हुई। अंतत: बीते शनिवार को पुलिस ने चांदना को हावड़ा के जीआईपी कॉलोनी स्थित एक घर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक चांदना ने वहां एक स्वास्थ्य केंद्र खोला हुआ था, जिसमें काफी भीड़ रहती थी।
वह खुद को नर्स बताकर वहां रह रही थी। गिरफ्तारी के बाद उसने पुलिस को इस धंधे में आने की कहानी बताई। पुलिस के अनुसार चांदना ने गरीबी के चलते पांच लाख रुपये में अपनी किडनी बेच दी थी।
यह पैसे कर्ज चुकाने और अन्य मद में खर्च हो गए तो उसने फिर उन्हीं लोगों से संपर्क साधा जिन्होंने उसकी किडनी निकाली थी। उन लोगों ने चांदना को एजेंट बनने का लालच दिया और चांदना उनकी कमीशन एजेंट बन गई। अभी तक पुलिस पूछताछ में पता चला है कि वह सिर्फ अमित राऊत के गिरोह की ही एजेंट नहीं थी बल्कि देश के अन्य गिरोह भी उसके संपर्क में है।
बताया जा रहा है कि अमित राऊत के गिरोह ने लालतप्पड़ के उक्त अस्पताल में 75 किडनी निकालकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बेची हैं। एक किडनी को वह 45 से 60 लाख रुपये में बेचते थे।
जबकि, कम पढ़ी-लिखी होने के कारण गिरोह सरगना उसे मात्र 25 हजार रुपये प्रति किडनी के हिसाब से कमीशन देता था। उसने पुलिस को बताया कि उसका पति बेरोजगार है। लिहाजा बच्चों और पति की जिम्मेदारी भी उसी पर है। ऐसे में उसने इस धंधे में उतरने की सोची।
विदेश में नौकरी का लालच देकर भेजती थी देहरादून
पुलिस के अनुसार चांदना गुड़िया लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने के बहाने देहरादून भेजती थी। कहती थी कि उन्हें शुरूआत में इसके लिए कुछ मेडिकल टेस्ट कराने होंगे, जिसके बाद खर्च के लिए पांच लाख रुपये मिलेंगे।
लोग उसकी बातों में आ जाते थे। उन्हें पांच लाख रुपये तो मिलते थे, लेकिन कोई नौकरी नहीं। ऐसे में कुछ लोग जब खफा हुए तो यह मामला धीरे-धीरे उजागर होने लगा और गत् वर्ष सितंबर में उसका भंडाफोड़ हो गया।