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तो क्या पहले से तय था खली का रेसलिंग में घायल होना?

Sat, 27 Feb 2016 08:20 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
वर्ल्ड रेसलिंग इंटरटेनमेंट (WWE) की फाइट को लेकर दुनियाभर के दर्शकों में भारी उत्साह हो लेकिन इसे स्क्रिप्टेड गेम माना जाता है।


कहा जाता है कि इसमें मारपीट के दांव से लेकर, चोट, खून और परिणाम तक सब पहले से तय होता है। कई बार बड़े मुकाबलों के परिणाम आयोजन से पहले मीडिया में प्रकाशित भी हुए हैं।

डब्ल्यूडब्ल्यूई भारत और उत्तराखंड के लिए बिल्कुल नया खेल है। द ग्रेट खली के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल में ताकत दिखाने के बाद भारत और उत्तराखंड में भी इसकी शुरूआत हुई। खली का पहला शो बुधवार (24 फरवरी) को हल्द्वानी में हो भी चुका है, जिसमें खली को तीन विदेशी रेसलरों ने धोखे से घायल कर दिया।


अब इस बात पर भी बहस शुरू हो गई है कि कहीं फाइट पहले से फिक्स तो नहीं थी। ऑनलाइन मीडिया में ऐसे कई मामलों का उल्लेख है कि हार-जीत से लेकर पहलवानों के ज्यादातर मूव तय थे।

इसके लिए पहलवान पहले फाइट की रिहर्सल भी करते हैं। हालांकि रेसलर के पास हजारों दर्शकों के बीच गलती का मौका नहीं होता है।
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कम इंजरी हो इसके लिए लगातार प्रैक्टिस

फाइट के दौरान रेसलर को कम से कम इंजरी हो इसके लिए लगातार प्रैक्टिस कराई जाती है। रिंग और चारों तरफ बिछाई जाने वाली व्हाईट मैट के साथ सस्पेंशन भी होता है, जिससे गिरने पर कम से कम चोट लगे।

कई बार बड़े पहलवान को हारने पर ज्यादा पैसे भी मिलते हैं। फाइट में ज्यादातर रेसलर का खून नकली होता है। मुंह से खून थूकने का इफेक्ट करने के लिए रेसलर ब्लड कैप्सूल का प्रयोग करते हैं। अखबारों ने कई बड़े मुकाबलों के परिणाम पहले ही प्रकाशित कर इन मुकाबलों के स्क्रिप्टेड होने की पुष्टि की है।

हालांकि इसमें स्पॉट कॉलिंग भी होती है, जिसमें प्रैक्टिस और स्क्रिप्ट छोड़कर वास्तविक रेसलिंग होती है। कुर्र्सी, सीढ़ी समेत अन्य चीजों से होने वाले वार यूं तो खेल में बैन हैं लेकिन ज्यादातर रेसलर वर्षों की प्रैक्टिस के साथ इसका इस्तेमाल करते हैं।

वह इस तरह वार करते हैं कि सामने वाले रेसलर को कम से कम इंजरी आए। हालांकि बहुत से ऐसे मुकाबले भी हुए हैं, जिनमें रेसलर को वास्तविक और गंभीर इंजरी हुई है।
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