गोरखा समुदाय की वीरता की याद दिलाने वाला खलंगा स्मारक देहरादून की शान में चार चांद लगाता है। राजधानी के नालापानी स्थित क्षेत्र में मौजूद यह स्मारक ब्रिटिश और गोरखाओं की बीच हुई 180 साल पुरानी लड़ाई की याद दिलाता है।
गोरखा सेना और अंग्रेजों के बीच युद्ध
रिस्पना नदी के किनारे 1000 फुट ऊंची पहाड़ी पर मौजूद यह स्मारक गढ़वाली शासकों के इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है। इस स्मारक के संरक्षण का जिम्मा संस्कृति विभाग के पास है।
खलंगा में दो सौ साल पहले गोरखा सेना और अंग्रेजों के बीच युद्ध हुआ था। वीर बलभद्र के नेतृत्व में गोरखा सेना ने अंग्रेजी सेना के प्रमुख जनरल गेलिस्पी को मार गिराया था।
अंग्रेजों ने बंद कर दिए थे पानी
उस दौरान गोरखा सेना के 600 सैनिक और उनके परिवार खलंगा किले में थे। अंग्रेजों ने किले तक पानी जाने के सारे स्रोत बंद कर दिए। इससे भीतर घायल सैनिक, बच्चे-बुजुर्ग, महिलाएं तड़पने लगे। वीर बलभद्र से उनका दर्द देखा नहीं गया। उन्होंने अंग्रेजों से कहा, तुम हमें हरा नहीं सकते। हम खुद ही किला छोड़कर जा रहे हैं।
बाद में यहां बलभद्र का 45 फीट ऊंचा स्मारक बनाया गया। हर साल यहां मेला लगता है, जिसमें हजारों लोग जुटते हैं। खलंगा स्मारक ऐतिहासिक धरोहर है।
यहां हर साल हजारों की संख्या में सैलानी जुटते हैं। इसके साथ ही गोरखाओं की वीरता को याद करने के लिए शहर के गढ़ीकैंट क्षेत्र में मेला भी आयोजित किया जाता है।