एसी, नई कार और सीएसआर को आयोग ने माना बेकार
गामा इन्फ्राप्रॉप ने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मद में 50 लाख रुपये का खर्च बिजली खर्च में जोड़ने की मांग की थी। आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सीएसआर कंपनी को अपने मुनाफे से करना होता है। इसका बोझ राज्य के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं डाला जा सकता। इसी प्रकार, पावर प्लांट और कंट्रोल रूम के लिए 17 लाख रुपये के नए एसी खरीदे गए। जब आयोग ने पुराने एसी का हिसाब मांगा तो कंपनी संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। पुराने एसी कबाड़ की तरह पड़े मिले। आयोग ने इस 17 लाख के खर्चे को नामंजूर कर दिया। प्लांट के जीएम के लिए 30 लाख रुपये की नई खरीदी गई। पुरानी कार सामान्य कर्मचारियों को दे दी गई। यूपीसीएल ने इस पर आपत्ति जताई। आयोग ने चेतावनी देते हुए खर्च को 50-50 फीसदी में बांटकर यूपीसीएल से अनुबंधित क्षमता के तहत केवल 15 लाख की अनुमति दी और भविष्य में गाड़ियों की फिजूलखर्ची से बचने की सख्त हिदायत दी।
2.18 करोड़ का दिखाया कूलर
विवाद का एक बड़ा केंद्र प्लांट में लगा इवेपोरेटिव कूलिंग सिस्टम रहा। यूपीसीएल का तर्क था कि जब महंगी गैस के कारण प्लांट ज्यादातर समय बंद रहता है तो करोड़ों रुपये का कूलिंग सिस्टम लगाने की क्या जरूरत थी। गामा इन्फ्राप्रॉप ने दलील दी थी कि गर्मियों में जब तापमान 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है तो हवा का घनत्व घटने से गैस टरबाइन हांफने लगती है। चालू ही नहीं हो पाती। इस कूलिंग सिस्टम से हवा ठंडी होती है जिससे पीक सीजन में प्लांट का उत्पादन 11 से 15 प्रतिशत बढ़ जाता है। आयोग ने तकनीकी पहलुओं और विशेषज्ञ सलाह को सही मानते हुए 2.18 करोड़ रुपये के इस खर्च को हरी झंडी दे दी।
उपभोक्ताओं से सात किस्तों में होगी वसूली
आयोग ने वर्ष 2024-25 के हिसाब में वार्षिक स्थिर प्रभार (एएफसी) पूर्व में ही मंजूर करने के बाद अब इसकी कैरिंग कॉस्ट सहित 16.37 करोड़ रुपये का घाटा और 84 लाख रुपये एनर्जी चार्ज मिलाकर कुल 17.21 करोड़ रुपये यूपीसीएल चुकाएगा। यह कुल बकाया राशि यूपीसीएल सितंबर से सात समान मासिक किस्तों में उपभोक्ताओं से वसूल करेगा।