भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट शनिवार को भैया दूज के मौके पर लग्नानुसार सुबह 8 बजकर 20 मिनट पर बंद कर दिए गए।
भक्तों के जयकारों के बीच बाबा केदार की पंचमुखी मूर्ति चल विग्रह डोली में शीलकालीन गद्दी स्थल ओमकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना हुई। बता दें कि ओमकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में स्थित है।
शनिवार को कपाट बंद होने से पूर्व मुख्य पुजारी बागेश लिंग बाबा केदार की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
विशेष पूजा के साथ शिव लिंग को भस्म से ढक दिया गया
kedarnath
पूजा के बाद बाद स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप देते हुए विशेष पूजा के साथ शिव लिंग को भस्म से ढक दिया गया। इसके बाद बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति का श्रृंगार कर चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया।
इसके बाद बाबा केदार की मूर्ति मंदिर परिसर में रखी गई। यहां पर अन्य धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए प्रशासन और बीकेटीसी के अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर चाबी उप जिलाधिकारी ऊखीमठ को सौंप दी गई।
इसके बाद बाबा केदार की डोली मंदिर की तीन परिक्रमा कर श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया।
अगले छह माह तक यहां होंगे बाबा के दर्शन
केदारनाथ
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डोली रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग में भक्तों को आशीष देते हुए रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी।
22 अक्तूबर को डोली रामपुर से विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। 23 अक्तूबर को बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी।
यहां पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। अगले छह माह तक भक्त यहीं बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।