पूछताछ में चिराग ने स्वीकार किया कि वह एक ट्रैवल एजेंट है और 19 श्रद्धालुओं के समूह के साथ केदारनाथ आया था। उसने स्वयं को आईआरसीटीसी एजेंट बताकर यात्रियों को वीआईपी दर्शन कराने का लालच दिया। इस पर 10 श्रद्धालु तैयार हो गए और प्रत्येक से 3-3 हजार रुपये लेकर कुल 30 हजार रुपये वसूले गए। हालांकि किसी प्रकार की आधिकारिक वीआईपी व्यवस्था नहीं थी। आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह यह काम मारवाड़ हाउस के मालिक अंकित शुक्ला के साथ मिलकर करता था। उसके अनुसार वसूले गए 30 हजार रुपये में से 25 हजार रुपये अंकित शुक्ला को दे दिए गए थे, जबकि पांच हजार रुपये उसने अपने पास रखे थे।
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से पांच हजार रुपये मिले। बरामद नकदी को सील कर कब्जे में लिया गया और आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। एसपी रुद्रप्रयाग निहारिका तोमर ने बताया कि यात्रा के दौरान पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। यात्रा के सुगम संचालन के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं साथ ही ठगी जैसी घटनाओं पर रोक के लिए पुलिस सख्ती बरत रही है। इसी के तहत आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।