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2013 केदारनाथ आपदा: ‘मर्ज’ तो खोज लिया, ‘इलाज’ अब भी चुनौती है, पढ़िए रिपोर्ट...

Mon, 17 Jun 2019 09:22 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड में केदारनाथ आपदा के बाद  प्रदेश सरकार ने काफी सबक सीखा है। लेकिन अब रेस्पोंस सिस्टम तैयार करने में सरकार को अभी बहुत मेहनत करनी होगी। आपदा का मर्ज खोज लेने के बाद अब यही इलाज बाकी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अब अस्तित्व में आ चुका है। कुछ महीनों में वहां दक्ष और विशेषज्ञ टीम भी तैनात हो जाएगी। छह सालों में आपदाओं की प्रकृति और उसके कारणों को समझने के लिए कई अध्ययन हुए।

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मौसम संबंधी सूचनाओं का एक तंत्र तैयार हुआ। इनसे आपदा के मर्ज को पकड़ लेने में मदद मिलेगी। लेकिन इस मर्ज का इलाज अकेले आपदा प्रबंधन विभाग के पास नहीं है, जब तक इसकी संवेदनशीलता को लेकर सरकारी विभागों, निजी संस्थाओं और राज्य नागरिकों में जागृति पैदा नहीं होती है। इस मोर्चे पर अब भी बहुत काम होना है। भवन निर्माण के बायलॉज में बेशक आपदाओं के खतरों से निपटने के उपाय करने की शर्तें लिखी हों, लेकिन सिस्टम उनका गंभीरता से पालन नहीं करा पा रहा। न ही लोगों में ये समझ पैदा हो पा रही है। अब इलाज की ओर भी ध्यान देना होगा। 

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आपदा के बाद क्या हुआ...

- राज्य में आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) का गठन
- सभी तहसीलें व आपातकालीन केंद्र सेटेलाइट फोन से लैस
- आपदा प्रतिवादन तंत्र (आईआरएस) को लागू किया गया
- विभागों में आपदा प्रबंधन योजनाओं पर किया गया फोकस
- डिजास्टर रिस्क डाटा बेस (डीआरडीबी) तैयार किया गया
 -भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ की घातकता का आंकलन किया गया
- आपदा के दौरान त्वरित निर्णय लेने में मददगार बनेगा डीआरडीबी
- सिंचाई विभाग को रिवर मैनेजमेंट इन्फारमेशन सिस्टम से जोड़ा गया
- 12,000 सरकारी भवनों की घातकता का आंकलन किया गया
- 90 अस्पतालों को सुरक्षित बनाने के लिए रेट्रोफिटिंग प्रोजेक्ट पर काम
- मौसम का पता लगाने को 107 आटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए गए
- 25 सर्फेस फील्ड ऑब्जरवेटरी, 28 रेन गेज व 16 स्नो गेज लगाए
- 16300 स्वयं सेवकों को खोज एवं बचाव का प्रशिक्षण दिया गया
- राज मिस्त्रियों को भूकंप सुरक्षित भवन बनाने का प्रशिक्षण जारी हैं
- प्रदेश व जनपद स्तर पर मॉक अभ्यासों के जरिये सिस्टम को चौकन्ना रखा गया 
- चमोली व रुद्रप्रयाग में विस्तृत भूगर्भीय अध्ययन किया
- बाढ़ के खतरे से बचाव के लिए भागीरथी व गंगा के किनारे साइनर लगाए

क्षमता विकास, जागरूकता, मौसम संबंधी सूचना तंत्र और तकनीकी सुधार के जरिये आपदाओं से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। हजारों सार्वजनिक भवनों का अध्ययन कराया जा रहा है, ताकि सुरक्षित बनाया जा रहा है। ये एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आपदा प्रबंधन न्यूनीकरण में तैनात लोगों की टीम निरंतर लगी है। पिछले छह वर्षों के दौरान हमने काफी कुछ सीखा है और नए सुधार किए हैं।
- अमित नेगी, सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग
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