- केदारनाथ आपदा में 4400 से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए।
- 4200 से अधिक गांवों का पूरी तरह से संपर्क टूट गया।
- 2141 भवन पूरी तरह से नष्ट हो गए।
- जलप्रलय में 1309 हेक्टेयर कृषि भूमि बह गई ।
- सेना व अर्द्ध सैनिक बलों ने 90 हजार लोगों को रेस्क्यू किया।
- 30 हजार लोग पुलिस ने बचाए।
- 55 नरकंकाल सर्च ऑपरेशन में खोजे गए।
- 991 स्थानीय लोग अलग-अलग जगहों पर मारे गए।
-11,000 से अधिक मवेशी बह गए या मलबे में दब गए।
- 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई।
- 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया।
- 100 से ज्यादा बड़े व छोटे होटल ध्वस्त हो गए।
- 90 हजार यात्रियों को यात्रा मार्गों से सेना ने निकाला।
- 30 हजार स्थानीय लोगों को पुलिस ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
- 09 राष्ट्रीय व 35 स्टेट हाईवे क्षतिग्रस्त हो गए।
- 2385 सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा।
- 86 मोटर पुल और 172 बड़े व छोटे पुल बह गए।
प्रदेश में पुनर्निर्माण पर खर्च हुए 2300 करोड़
2013 की आपदा से मची तबाही के बाद पुनर्निर्माण से जुड़े मध्यकालिक और दीर्घकालिक कार्यों पर करीब 2700 करोड़ खर्च हुए। विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक वित्त पोषित उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट के तहत 2,300 करोड़ रुपये की राशि सड़कों, पुलों, पहाड़ियों के ट्रीटमेंट, बेघर लोगों के आवासों का निर्माण पर खर्च हुई। प्रोजेक्ट के तहत 2,382 भवनों का निर्माण किया गया।