केदारनाथ आपदा में मारे गए लोगों के शवों की पहचान के लिए हैदराबाद की प्रयोगशाला से कराए गए डीएनए टेस्ट के खर्च का बजट सरकार ने अब तक पुलिस मुख्यालय को नहीं दिया।
इस कारण आपदा के तीन साल बाद भी बकाया 83 लाख रुपये का भुगतान लैब को नहीं हुआ। कई बार के पत्राचार के बाद भी कोई हल न निकलने पर अब प्रयोगशाला प्रशासन ने पत्र लिखकर सख्त नाराजगी जताई तो पुलिस मुख्यालय ने भी शासन को पत्र भेजकर अविलंब भुगतान करने की मांग की।
केदारघाटी में 16 जून 2013 को आई आपदा में जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। तीर्थ यात्रा पर आए देश के तमाम हिस्सों के लोगों की जाने गईं थी। घाटी से करीब 836 शव बरामद हुए थे। सरकार ने इनकी पहचान कराने के लिए डीएनए टेस्ट कराए थे। इसके लिए 192 ब्लड सैंपल मिलान के लिए हैदराबाद प्रयोगशाला भेजे गए थे। प्रयोगशाला तंत्र ने आपदा से जुडे़ शवों के डीएनए मिलान को अमेरिका में विकसित हुए नए साफ्टवेयर को हायर किया था।
ब्लड सैंपल कम होने के कारण मात्र 18 सैंपल ही मैच कर पाए थे। डीएनए टेस्ट की पूरी प्रक्रिया पुलिस विभाग द्वारा की गई थी। इसमें करीब 83 लाख रुपये खर्च हुए थे। सरकार ने डीएनए टेस्ट तो करवा लिए, लेकिन पैसा देना भूल गई।
नतीजन तीन साल बीतने के बाद भी अब तक की प्रयोगशाला को उसका भुगतान नहीं हो पाया है। भुगतान के लिए प्रयोगशाला प्रशासन ने कई बार पत्राचार भी किया, लेकिन शासन नहीं चेता। अब जब प्रयोगशाला की ओर से सख्त नाराजगी जताई गई तो पुलिस मुख्यालय ने भी शासन को अविलंब भुगतान करने का पत्र भेज दिया।
2013 में आई आपदा में लावारिस शवों की पहचान हेतु डीएनए टेस्ट में करीब 83 लाख रुपये खर्च हुए थे। शासन से इसके लिए बजट न मिलने के कारण हैदराबाद प्रयोगशाला का भुगतान नहीं हो पाया है। शासन को फिर से पत्र लिखकर यह रकम उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
- राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन