केदारनाथ, बदरीनाथ और दूसरे धाम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षित सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक शरत शर्मा ने बताया कि इस संबंध में विभाग ने कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया है, लेकिन केंद्र सरकार के निर्देश पर स्थलों के निर्माण का क्षरण रोकने के लिए उपचार किया जाता रहेगा।
अतिरिक्त महानिदेशक शर्मा न्यू कैंट रोड स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे। उन्होंने बताया कि संरक्षित और पुरातन विरासतों को सहेजने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक अपनाए जा रहे हैं।
विभिन्न पत्थरों के बने स्मारकों पर अलग-अलग रासायनिक उपचार की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान केदारनाथ मंदिर के भवन को पहुंची क्षति को दुरुस्त किया जा चुका है। यहां अंतिम चरण का कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के जागेश्वर और गोपेश्वर स्थल को आदर्श विरासत में शामिल किया गया है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मंदिरों केजीर्णोद्धार के लिए पत्थर नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश में खनन बंद होने से यह दिक्कत आई है। महंगे दामों पर पत्थर बाहर से मंगाने पड़ रहे हैं। प्रदेश में कारीगर भी नहीं है। इन्हें भी बाहर से बुलाया जाता है। प्रदेश के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्थलों के अलावा सरकार के निर्देश पर दूसरे स्थलों के क्षरण को रासायनिक उपचार से ठीक किया जाएगा।