इस मौके पर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। इसके बाद सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए सुबह 8.30 बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
पुलिस अधीक्षक अजय सिंह, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, उप जिलाधिकारी वरुण अग्रवाल, उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार, पुलिस उपाधीक्षक दीपक सिंह, 10 जम्मू-कश्मीर लाईट इनफैंटरी के द्वितीय कमान अधिकारी कैप्टन कारज सिंह संधू, चौकी प्रभारी मंजुल रावत की मौजूदगी में कपाट पर ताला लगाकर उसे सील करने के बाद चाबी प्रशासन को सौंपी गई। बाबा केदार की चल विग्रह डोली ने केदारनाथ मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद सेना की बैंड धुनों के साथ अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया।
इस मौके पर मंदिर समिति के लेखाकार आरसी तिवारी, मंदिर सुपरवाइजर युद्धवीर पुष्पवान, प्रबंधक अरविंद शुक्ला, लोकेंद्र रिवाड़ी, मनोज शुक्ला, पारेश्वर त्रिवेदी मृत्युंजय हीरेमठ, सुदीप रावत आदि मौजूद रहे। जय बाबा केदार के जयकारों के साथ चल विग्रह उत्सव डोली 17 किमी. लंबे पैदल मार्ग के विभिन्न पड़ावों से होते हुए गौरीकुंड और सोनप्रयाग पहुंची। यहां पर भक्तों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भव्य स्वागत किया।
दोपहर बाद डोली प्रथम पड़ाव रामपुर पहुंची। जहां पर समिति के कार्यधिकारी एनपी जमलोकी ने डोली का स्वागत किया। बताया कि 30 अक्तूबर को डोली काशी-विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में रात्रि प्रवास करेगी। जबकि 31 अक्तूबर को बाबा केदार की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में छह माह के लिए विराजमान होगी।