बच्चा मिट्टी खाएगा तभी तो भविष्य बनाएगा, अभी मिट्टी खा रहा है, कल लोहा, लक्कड़ और न जाने क्या-क्या खाएगा, ओएनजीसी में देर शाम आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन में कवियों ने इसी तरह कविताओं के माध्यम से भ्रष्टाचार पर तंज कसे।
वहीं बढ़ती उम्र के साथ जीवन के अनुभव भी बयां किए गए। सभागार में हास्य व्यंग्य की ऐसी धारा बही कि श्रोता लोटपोट हो गए।
एमएन घोष सभागार में था आयोजन
ओएनजीसी मुख्यालय राजभाषा विभाग की ओर से एएमएन घोष सभागार में आयोजित सम्मेलन में प्रसिद्ध कवि लक्ष्मी दत्त तरुण ने- 'आसमान ने धरती से पूछा एक बात कहोगी और कितने दिन दूर रहोगी' प्रस्तुत की।
वहीं भ्रष्टाचार पर उन्होंने कविता प्रस्तुत की, 'छोटा सा जेबकतरा हूं, पुलिस वाले को साथ लेकर चला गया तो आप जलते हैं, विधायक, मंत्री कमांडो लेकर चलते हैं।'
समझदार तो बनो
कवि राजेंद्र मालवीय आलसी ने बढ़ती उम्र के पड़ाव को कुछ इस तरह बयां किया। उन्होंने कहा, 'पांच और 10 बचपन में गुजर जाता है, 15 और 20 समझ में नहीं आता है, तुम्हें हक है 25 व 30 में तनतनाते रहो मगर 35 और 40 में समझदार तो बनो।'
कार्यक्रम में कवि घनश्याम अग्रवाल, धमचक मुल्तानी, रतन सिंह रतन, नफीसुद्दीन और मुकेश गौतम ने कई शानदार कविताएं प्रस्तुत की।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि ओएनजीसी एकेडमी के संस्थान प्रमुख केएन मेहरोत्रा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में महाप्रबंधक प्रधान निगमित प्रशासन देशदीपक मिश्र, रजनीश त्रिवेदी आदि मौजूद थे।