देहरादून स्थित आयुध निर्माणी में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हंसी की फुहारों के बीच कवियों ने देश और समाज के जलते सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश भी की।
कुछ इस तरह सजी महफिल
शनिवार शाम कार्यक्रम का उद्घाटन आयुध निर्माणी के महाप्रबंधक सीएस विश्वकर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। शुरुआत शैलेंद्र शर्मा ने बहुत है आसान अमीर होना.. से की।
इसके बाद बेशक उपवन के गुलाब तो लाजवाब है... सुनाया। कानपुर के कवि पंकज ने तेरी आखों से समंदर भी छलक सकता था..., डा. सुरेश अवस्थी ने लाओ कहीं से आग मशालों के वास्ते... सुनाई।
विनोद श्रीवास्तव ने धर्म छोटे बड़े नहीं होते, जानते तो लड़े नहीं होते.. सुनाई। राघवेंद्र त्रिपाठी ने प्लेजर है प्रेमिका तो बीबी जान डबल रिस्क है... सुनाकर माहौल खुशनुमा कर दिया।
डा. कमल द्विवेदी ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चाय बेच पीएम बने ऐसा किया उपाय, लगता है सब दल अब बेचेंगे चाय... सुनाई। देवेंद्र सफल ने दे खुशहाल रहे खुशी बेमिसाल रहे...
महेंद्र ने कैसे प्रतिमान हुए हैं, खलनायक भगवान हुए हैं..,, देवीचरण कश्यप अक्स ने जिनकी पत्नी रखती है बड़े नाखून.. सुनाई। संचालन करते हुए श्रवण कुमार शुक्ला ने सच को सच न कहें उसका मान कैसा... कविता सुनाई।
आयुध निर्माणी के अधिकारी रघुवीर सिंह, एसबी मिश्रा, एके मिश्रा, राजेश, अनिल उनियाल, अशोक शर्मा, अनिल सती आदि मौजूद रहे।