गोपाल मंदिर के पुजारी जगमोहन मिश्रा और गीतानगर स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी भूपेंद्र बडोनी ने बताया कि बुधवार को सुबह से तृतीया तिथि रहेगी, दोपहर 3:24 से चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। चतुर्थी तिथि का महत्व उदय व्यापिनी से नहीं अपितु चंद्र व्यापिनी से लिया जाता है, इसलिए व्रत इसी दिन रखा जाएगा।
चतुर्थी तिथि उस दिन रातभर रहते हुए दूसरे दिन 5:14 तक रहेगी। उन्होंने कहा कि इस दिन पूजन का सर्वोत्तम समय सायंकाल 5:29 से 6:48 तक रहेगा, जबकि चंद्रमा का उदय 8:16 पर होगा। सुहागिन स्त्रियां पति की लंबी आयु और अपने घर गृहस्थी के सफल संचालन के लिए सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेकर ब्रह्म मुहूर्त में जल ले सकती हैं।
इस व्रत में दिनभर जल ग्रहण नहीं किया जाता। पूजन की सामग्री फूल फल इत्यादि एकत्रित कर रात को पूजा करने और करवे में जल भरकर उसके ऊपर दीपक जलाएं, जो चंद्रोदय तक चलता रहेगा। इस दौरान करवा चौथ की कथा पढ़े, और उसका श्रवण करें।
मन, वचन से भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करें। माता पार्वती को यथा सामर्थ्य श्रृंगार चढ़ाएं। चंद्रमा के दर्शन करने पर उन्हें अर्घ्य देने के बाद पति की ओर से पिलाए गए जल से व्रत का पारायण करें। उसके बाद भजन कीर्तन करें। ऐसा करने से गृहस्थी पर भगवान गणेश का आशीर्वाद बना रहेगा।