तब से इस गोत्र में करवाचौथ का त्योहार नहीं मनाया जाता है। इस गोत्र के वंशज आज अपने गांव से निकल कर दुनिया में कहीं भी बस गए हों, मगर अपने पुरखों द्वारा तय इस परंपरा का निर्वाह अवश्य करते हैं।
उस नवविवाहिता का मंदिर सहारनपुर जनपद के जड़ौदा पांडा गांव में बना हुआ है। जहां आज भी भारद्वाज गोत्र की वधु साड़ी व प्रसाद चढ़ाकर अपने बच्चों व पतियों की लंबी उम्र की मन्नत मांगती है।