देहरादून। पटेलनगर स्थित टीएचडीसी कॉलोनी में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण का बुधवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथा में आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने कहा कि कर्म ही हमारे भाग्य के निर्माता होते हैं। वर्तमान के अच्छे-बुरे कर्म ही भविष्य में हमारे भाग्य का निर्धारण करने वाले हैं। परमात्मा से कभी शिकायत मत करों, क्योंकि आप अभी इतने समझदार नहीं हुए कि उनके इरादे समझ सको। उन्होंने कहा कि आपके पास समय हो तो उसे दूसरों के भाग्य को सराहने में न लगाकर स्वयं के भाग्य को सुधारने में लगाओ। परमात्मा भाग्य का चित्र अवश्य बनाता है लेकिन उसमें कर्म रूपी रंग तो हमारे द्वारा स्वयं ही भरा जाता है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ कर्म ही श्रेष्ठ भाग्य का निर्माण करते हैं। इस अवसर पर मीरा कुकरेती, गणेश कुकरेती, विजय लक्ष्मी, राधा कुकरेती आदि मौजूद रहे। संवाद