काश, हमेशा मिले वह इज्जत
बोफोर्स सबसे बड़ा सहारा था। दिन हो या रात, केवल बम और गोलियों की आवाज कानों में गूंजती थीं। एक रात तो मौत से सीधे सामना हुआ। लोग कम थे और पाकिस्तानी फौज सामने से लगातार हमला कर रही थी। इसके बावजूद रातभर मोर्चा संभाला। दोनों दोस्तों ने बताया कि युद्ध के वक्त उन्हें समझाया गया था कि अब देश के लिए जान की बाजी लगाने का वक्त आ गया है। आपके बीवी-बच्चों को देश संभालेगा। अब हथियार ही आपकी बीवी है। यह अंत समय तक आपका साथ देगा। हवलदार अरविंद सिंह व राजेश मल्ल का कहना है कि एक फौजी देश के लिए लड़ता है। जैसा सम्मान कारगिल के दौरान मिला, वैसा ही हमेशा मिलना चाहिए। फौजी ड्यूटी पर जाता है तो अक्सर पूरा रास्ता ट्रेन में खड़े-खड़े काट देता है।