कारगिल में शहीद हुए सिपाही प्रवीन कुमार थापा के भाई नवीन थापा चाय बेचकर गुजर बसर कर रहे हैं। उनको नौकरी देने की सरकार की घोषणा केवल घोषणा बनकर रह गई। इसके अलावा घोषणा के मुताबिक न तो परिजनों को पेट्रोल पंप मिला और न ही जमीन। कारगिल 11 दिसंबर 1998 में आतंकियों से लोहा लेते हुए गोरखा राइफल के सिपाही प्रवीन कुमार थापा शहीद हो गए थे।
शहर से सात किलोमीटर दूर गल्जवाड़ी, छड़ीवाला निवासी प्रवीन के शहीद होने के बाद कुछ दिनों तक कैंडल मार्च, शोकसभाओं का आयोजन तो किया गया। उस समय सरकार की ओर एक परिजन को सरकारी नौकरी, एक पेट्रोल पंप मिला और जमीन देने की घोषणा की शहीद के भाई नवीन थापा ने बताया कि सरकार की ओर से पेट्रोल पंप, जमीन और नौकरी देने की घोषणा की गई थी लेकिन सालों बाद भी कुछ नहीं मिल पाया।
इस संबंध में उन्होंने कई बार स्थानीय विधायक से भी बात की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। प्रवीन के मझले भाई विनोद भी सेना से सेवानिवृत्त हो गए हैं। जबकि छोटे भाई नवीन थापा चाय बेचकर गुजर बसर कर रहे हैं। परिजनों को आज भी उम्मीद है कि सरकार की ओर से कोई न कोई सहायता की जरूर की जाएगी।
शहीद प्रवीन कुमार थापा को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। शहीद के छोटे भाई नवीन ने बताया कि उनके परिवार को बेटे प्रवीन की शहादत पर गर्व है। हालांकि खुद के जुदा होने का दुख भी है।
शहीद प्रवीन कुमार थापा के भाई नवीन थापा उनकी स्मृति में चार साल ही फुटबॉल टूर्नामेंट करा पाए।
नवीन ने बताया कि चार साल स्थानीय लोगों के सहयोग से शहीद प्रवीन की स्मृति पर फुटबॉल टूर्नामेंट कराया गया, लेकिन पांचवें साल आर्थिक तंगी के चलते टूर्नामेंट नहीं कराया गया। जिसके बाद से टूर्नामेंट ही नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि प्रवीन बहुत अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी थे। राज्य स्तर पर उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते थे।