26 जुलाई 1999 में कारगिल युद्ध में कई सैनिक शहीद हुए थे। तीर्थनगरी का लाल मनीष थापा भी इस युद्ध में भारत मां की सेवा करते शहीद हो गया था। युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में केंद्र सरकार ने पेट्रोल पंप का लाइसेंस, शहीद स्मारक द्वार, भूमि समेत कई घोषणाएं की। सरकार की कुछ घोषणाएं तो धरातल पर साकार हो गई। लेकिन कुछ घोषणाएं अभी भी ऐसी हैं जो आज तक पूरा नहीं हुए हैं। शहीद के सम्मान के लिए परिजन शासन-प्रशासन के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
Kargil Vijay Diwas: शहीदों की शहादत की कद्र नहीं, कहीं शिलापट गायब तो कहीं मिट गए निशान, तस्वीरें
गली नंबर एक अपर गंगानगर ऋषिकेश निवासी शहीद मनीष थापा के बड़े भाई मनोज थापा ने बताया कि कारगिल युद्ध में उनका छोटा भाई 19 वर्षीय मनीष थापा शहीद हो गया था। भाई के शहीद होने पर परिजनों में दुखों का पहाड़ टूट गया। केंद्र सरकार ने शहीद की याद में उन्हें वीरपुर खुर्द में करीब पांच बीघा भूमि उपलब्ध कराई।
इसके साथ ही शहीद के याद में पेट्रोल पंप का लाइसेंस मिलना था। 23 साल गुजर गए हैं, लेकिन आज तक उन्हें पेट्रोल पंप का लाइसेंस नहीं मिला है। कहा वीरपुर खुर्द में उन्हें जितनी जमीन मिली थी कुछ जमीन में रंभा नदी के कारण पुस्ता निर्माण हो गया है, अब उनके पास कितनी भूमि है इसकी नापजोख नहीं की है।
शहीद मनीष थापा की मां 75 वर्षीय राधा देवी ने बताया कि एक मां की धन दौलत उसके लिए उसकी संतान होती है। मुझे गर्व है कि मेरा लाल भारत मां की सेवा करते शहीद हुआ। उसकी याद में सरकार ने उन्हें पेट्रोल पंप का लाइसेंस भी देने की घोषणा की थी। लेकिन वह उन्हें आज तक नहीं मिला है। करीब 23 साल बीत गए हैं, लेकिन केंद्र सरकार को शहीद के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक मदद की सुध नहीं आ रही है।