विजय के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी घर छोड़ कर चली गई, लेकिन सरकार की ओर से विजय की पत्नी को पेंशन मिलने लगी। विजय की माता रामचंद्री देवी ने बताया कि बेटे की पेंशन का मात्र 20 प्रतिशत हिस्सा ही उन्हें मिलता है। जबकि विजय की पत्नी का उस घर से अब कोई नाता नहीं है।
अपने खर्च पर बनाया शहीद द्वार
विजय के शहीद होने के बाद पिता ने श्यामपुर, प्रेमनगर स्थित अपने आवास पर अपने खर्च से शहीद द्वार बनाया। साथ ही शहीद द्वार के पास पंचायती मिलन केंद्र भी बनवाया। विजय की मां रामचंद्री देवी ने बताया कि शहीद द्वार की मरम्मत अपने खर्च पर ही कराती हैं।
नहीं बना शहीद स्मारक
प्रेमनगर में 18 सितंबर को चले अतिक्रमण के महाअभियान में शहीद विजय सिंह के नाम का शहीद स्मारक भी तोड़ दिया गया था, लेकिन नौ महीने बीत जाने के बाद भी स्मारक नहीं बनाया गया। समाजसेवी बीरू बिष्ट ने बताया कि इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करने समेत जिलाधिकारी को भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।