मान्यता है कि हरकी पैड़ी से गंगाजल ले जाकर सावन के महीने में अपने मान्य शिवालय में भगवान भोले शंकर का जलाभिषेक करने से मन्नत अवश्य पूरी होती है। जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि प्रशासन कांवड़ियों का हरिद्वार में स्वागत करने को तत्पर है। उन्होंने कांवड़ियों और जनता से भी मेला सकुशल संपन्न कराने में मदद की अपील की है।
प्रशासन का अनुमान है कि इस बार यात्रा में ढाई करोड़ से ज्यादा कांवड़िये हरिद्वार पहुंचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में कांवड़ियों के पहुंचने से शहर में यातायात समेत अन्य व्यवस्थाएं संभालना बड़ी चुनौती रहेगी। प्रशासन ने तीन स्तरीय यातायात प्लान बनाया है जिसे आवश्यकता और परिस्थिति के हिसाब से लागू करने की योजना है।
प्रशासन ने तेज आवाज में डीजे बजाने और छह फुट से ऊंची कांवड़ लाने पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इससे पहले डीजे बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध था, लेकिन यूपी सरकार के अनुमति देने और स्थानीय विधायकों की मांग पर सरकार ने इस बार राहत दी है। ऊंची कांवड़ को लेकर भी मानक तय कर 6 फीट अधिकतम सीमा कर दी गई है।
हरिद्वार में कांवड़ मेला के शुभारंभ के साथ ही आस्था के पथ पर सेवा के दरबार भी सजने लगे हैं। शनिवार की रात से ज्वालापुर में कांवड़ सेवा शिविर का शुभारंभ होगा। कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ सेवा शिविरों की भी अलग ही महत्ता है। मान्यता है कि तमाम कष्ट उठाकर भगवान भोले शंकर की कांवड़ चढ़ाने जाने वाले शिवभक्तों की सेवा करना भी परम पुण्य का काम है। इससे प्रेरित होकर कांवड़ मार्ग पर जगह-जगह सेवा शिविर लगाए जाते हैं।
स्थानीय लोगों के साथ दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, हरियाणा, पंजाब आदि प्रदेशों से लोग शिविर लगाने यहां पहुंचते हैं। ज्वालापुर में पुल जटवाड़ा के पास पिछले 34 सालों से कांवड़ियों की सेवा कर रहे कांवड़ सेवादल सेवा समिति सीतापुर के पदाधिकारियों ने इस बार भी बड़े पैमाने पर कांवड़ सेवा शिविर के आयोजन का निर्णय लिया है। पुल जटवाड़ा के पास लगाए जा रहे सेवा शिविर का शुभारंभ शनिवार की रात करीब आठ बजे शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक करेंगे।