प्राचीन नीलकंठ धाम शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। श्रावण महीने में आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा में यहां देशभर से लाखों भक्त उमड़ते हैं। प्राचीन शिवालय की कष्टकारी यात्रा कर और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर श्रद्धालु मनवांचित फल की प्राप्ति करते हैं। पौराणिक धाम की लगातार बढ़ती ख्याति के चलते यहां साल दर साल श्रावण यात्रा में कांवड़ियों की आमद में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
दिल्ली से सिद्धपीठ श्री नीलकंठ महादेव मंदिर की दूरी करीब 250 किलोमीटर है। दिल्ली से तीर्थनगरी ऋषिकेश तक सड़क, रेल और हवाई तीनों सेवाएं उपलब्ध हैं। ऋषिकेश से सड़क मार्ग से नीलकंठ महादेव मंदिर की दूरी करीब 25 किमी. जबकि लक्ष्मणझूला से नीलकंठ की दूरी 20 किमी. है। स्वर्गाश्रम से नीलकंठ धाम के लिए करीब 10 किमी. का पैदल मार्ग भी है।
उत्तराखंड में सर्वाधिक श्रद्धालुओं आते हैं धाम
प्राचीन नीलकंठ शिवालय उत्तराखंड के मठ-मंदिरों में दर्शनार्थियों की आमद के लिहाज से पहला धाम है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो यहां अकेले श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में लगभग 60 लाख शिवभक्त दर्शन व जलार्पण के लिए उमड़ते हैं। इस लिहाज से वर्ष भर में पौराणिक नीलकंठ धाम के दर्शन को करीब सवा करोड़ शिव भक्त आते हैं।