उत्तराखंड सरकार पर उत्तरप्रदेश और हरियाणा सरकार का दबाव था। इन दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। दोनों राज्य कांवड़ यात्रा के संचालन की तैयारी कर रहे हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के अधिकारियों को 25 जुलाई से कांवड़ यात्रा के संचालन की तैयारी के आदेश दिए हैं।
सरकार को कोर्ट का भी भय
प्रदेश सरकार चारधाम यात्रा भी शुरू नहीं कर पाई है। उच्च न्यायालय ने यात्रा शुरू करने पर रोक लगा रखी है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। ऐसे में कांवड़ यात्रा के संचालन पर भी सरकार न्यायिक वाद में फंस सकती है। सरकार को कोर्ट का भय भी सता रहा है।
अधिकारी कांवड़ यात्रा के पक्ष में नहीं
मुख्यमंत्री की बैठक में उच्चाधिकारियों ने साफ कर दिया कि कोविड 19 महामारी को देखते हुए कांवड़ यात्रा का संचालन करना उचित नहीं होगा। यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड आएंगे और उन सभी के कोविड टेस्ट करने के संभव नहीं होंगे। यात्रा को सीमित करने के लिए भी बहुत सारे इंतजाम करने पड़ सकते हैं।
पाटी (चंपावत) में देवीधुरा के मशहूर बगवाल मेले से संशय के बादल 22 जुलाई को हट जाएंगे। इस दिन मां बाराही धाम मंदिर समिति की बैठक में मेले के आयोजन के तरीकों को लेकर विचार मंथन होगा। इसके बाद आयोजक संस्था जिला पंचायत और जिला प्रशासन की मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक होगी।
आषाड़ी कौतिक (रक्षाबंधन) को होने वाली बगवाल 22 अगस्त को होगी। फल-फूलों से खेली जाने वाली बगवाल में चार खाम (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग) और सात थोकों के योद्धा फर्रों के साथ शिरकत करते हैं। मां बाराही मंदिर समिति के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया ने बताया कि मेले के आयोजन को लेकर मंदिर समिति 22 जुलाई को देवीधुरा मंदिर समिति परिसर में बैठक करेगी।
इस बैठक में कोरोना के बीच मेले को सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने पर चर्चा होगी। समिति अपने निर्णय से जिला पंचायत और प्रशासन को अवगत कराएगी। पिछले साल की तरह ही यद्यपि इस बार भी कोरोना की वजह से दो सप्ताह तक चलने वाले बगवाल मेले के होने की संभावना खासी कम हो गई है।