इनकी खोज में देश-विदेश के विज्ञानी जुटे हुए हैं। इसी क्रम में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को यह उपलब्धि हाथ लगी। बीएसआई के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. प्रशांत पुसालकर और डॉ. डीके सिंह ने पश्चिमी हिमालय में वनस्पतियों के नए वंश के तीन समूहों को खोजा।
इसके अध्ययन के बाद पाया गया कि ये वनस्पतियां केरिओफिलेस कुल की अन्य प्रजातियों से बिल्कुल अलग हैं। नई खोजी गईं वनस्पति प्रजातियां शिव-पार्वती सिलिओलाटा, शिव-पार्वती ग्लेंडुलिजेरा और शिव-पार्वती स्ट्रेचेई को अति विशिष्ट माना जा रहा है।
विज्ञानियों का कहना था कि इस वंश की प्रारूप प्रजाति शिव-पार्वती ग्लेंडुलिजेरा के फूलों के बीच में दिखने वाला नीला रंग शिव के नीले कंठ की समरूपता दर्शाता है। इसके साथ ही इसका सफेद रंग पवित्रता का प्रतीक है। इसी वजह से हिमालय के अधिपति भोलेनाथ और माता पार्वती को इसे समर्पित किया गया है। यह प्रजाति 4000 से 5500 मीटर ऊंचाई पर पश्चिमी हिमालय में पाई जाती है।
हिमाच्छादित शिखरों की ढलानों, दर्रों, ग्लेशियर घाटियों के हिमोढ़ों में स्थित एकांत अधिवास में नए वंश की प्रजातियां उगती हैं। अति सुंदर फूलों वाली इन प्रजातियों का यह समूह हिमालय के अधिपति भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित किया गया है।
- डॉ. प्रशांत पुसालकर, वरिष्ठ विज्ञानी, क्षेत्रीय कार्यालय, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण
इस खोज के जापान के अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होने के बाद पूर्वी हिमालय की तीन और तिब्बत (चीन) की चार प्रजातियां चीन और अमेरिकी विज्ञानियों ने इस समूह में स्थानांतरित की।
इस तरह समूह में 10 प्रजातियां हो गईं। ये शिव-पार्वती फोरेस्टी, शिव-पार्वती लड्लोवी, शिव-पार्वती रैमेलाटा, शिव-पार्वती रोडांथा, शिव-पार्वती मोनांथा, शिव-पार्वती मैलांड्रीआईडिस और शिव-पार्वती मैलांडूफोर्मिस हैं।