यात्रियों ने बताया कि चीन सीमा में प्रवेश करते ही जगह-जगह लोग स्थानीय उत्पादों को बेचते नजर आए। केएमवीएन को स्थानीय रोजगार और उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने के लिए यह व्यवस्था धारचूला से आगे के पड़ावों पर भी करनी चाहिए। मोबाइल कनेक्टिविटी, मेडिकल सपोर्ट, बिजली सुविधा में काम करने की जरूरत है। वाया नेपाल यात्रा कराने वाले प्राइवेट ऑपरेटर्स को केएमवीएन के संसाधनों और यात्रा मार्ग से जोड़ा जाए, इससे बॉर्डर पर पलायन, रोजगार के साथ ही केएमवीएन की आजीविका भी बढ़ेगी।
यात्रा पूरी कर लौटा आखिरी दल
कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर आखिरी 18वां दल बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे काठगोदाम पर्यटक आवास गृह पहुंचा। टीआरसी प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे, बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर दीपक पांडे, सतेंद्र जुयाल, शेरी राम, अनीस आदि ने उनका स्वागत किया। प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि इस बार 23 राज्यों के 923 यात्रियों ने यात्रा की। इनमें गुजरात से 137, यूपी से 128 और दिल्ली से 127 यात्रियों ने प्रतिभाग किया।
पहली बार यात्रा पर गई राजेश्वरी मोहन कोसे (53, मुंबई), ख्याति (37, गुजरात), शुचि (35, हिमाचल प्रदेश), जितेंद्र शर्मा (50, छत्तीसगढ़) ने बताया कि यात्रा कठिन है लेकिन ऐसा महसूस नहीं हुआ। कण-कण ने ईश्वरीय शक्ति का आभास कराया।
10वीं बार यात्रा पर गईं रुद्रपुर की डॉ. रजनीश
तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित रुद्रपुर निवासी डॉ. रजनीश बत्रा (54) ने बताया कि 10 वीं बार कैलाश की यात्रा पर जाने का सौभाग्य मिला। यात्रा के दौरान ऐसा लगा मानो भगवान शिव अपनी तरफ खींच रहे हों।