कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल ने बर्फबारी के बीच लिपुपास से चीन तिब्बत सीमा में प्रवेश कर लिया है। चीनी सुरक्षा एजेंसियों के साथ यात्री सकुशल तकलाकोट पहुंच गए हैं। तकलाकोट से यात्री शनिवार को दार्चिन के लिए रवाना होंगे।
कैलाश यात्रियों के इस पहले दल में 49 पुरुष और नौ महिलाओं सहित कुल 58 यात्री शामिल हैं। बृहस्पतिवार को यह दल रात ढाई बजे नाभीढांग से लिपुपास के लिए रवाना हुआ। आईटीबीपी के चिकित्सक डॉ. राहुल रावत के मुताबिक यात्रियों को बर्फबारी का भी सामना करना पड़ा। दल ने सुबह 7:15 बजे लिपु दर्रे को पार कर तिब्बत चीन सीमा क्षेत्र में प्रवेश किया।
आईटीबीपी सातवीं वाहिनी की मेडिकल, संचार और महिला कमांडो दस्ते ने यात्रियों को चीनी सुरक्षा एजेंसियों के सुपुर्द किया। लिपुपास में यात्रियों के वीजा, सामान आदि की जांच के बाद दल 8:15 बजे करीब 200 मीटर पैदल चल उसके बाद वाहनों में चीन की व्यापारिक मंडी तकलाकोट को रवाना हुआ।
11:15 बजे यात्री सकुशल तकलाकोट पहुंच गए। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार यात्री शुक्रवार को भी तकलाकोट में ही विश्राम करेंगे। शनिवार को यात्री दार्चिन को रवाना होंगे। उच्च हिमालयी क्षेत्र लिपुपास में अभी तीन फीट तक बर्फ जमा है। बृहस्पतिवार सुबह भी बर्फबारी हुई।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों का तीसरा दल बृहस्पतिवार को दिल्ली से टीआरसी काठगोदाम पहुंचा। यहां निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया। बाद में यह दल अल्मोड़ा को रवाना हो गया।
टीआरसी प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि दल में 56 यात्री हैं, जिनमें 36 पुरुष और 20 महिलाएं हैं। लाइजनिंग आफिसर केदार बुरांडी और भारती महापात्रा हैं। सबसे अधिक उम्र के यात्री फरीदाबाद निवासी प्रेम प्रकाश पसरीजा (66) और सबसे कम उम्र के यात्री बंगलूरू निवासी निलेश जगदीश जैन (25) हैं।
यहां पहुंचने पर शुभांशी पांडे, प्रियांशी पांडे, कुमकुम त्रिपाठी समेत निगम के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने तिलक लगाकर और फूल माला पहनाकर यात्रियों का स्वागत किया। इस दौरान यात्री बम-बम का उद्घोष करते रहे। दल में जल निगम हल्द्वानी में कार्यरत अधीक्षण अभियंता डीपी सिंह भी शामिल हैं, जो दूसरी बार यात्रा पर जा रहे हैं।
पंच कैलाश, पंच केदार और पंच बदरी की यात्रा कर चुके हैं नंद लाल
दिल्ली स्थित कस्टम विभाग से सेवानिवृत्त हुए नंद लाल (66) लगातार 9वीं बार कैलाश यात्रा पर जा रहे हैं। वर्ष 2013 में केदारनाथ हादसे के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा निरस्त होने का उन्हें मलाल है अन्यथा उनकी यह दसवीं यात्रा होती। नंद लाल अब तक पंच कैलाश (कैलाश मानसरोवर, आदि कैलाश, मणी महेश्वर, श्रीखंड कैलाश और किन्नर कैलाश) के अलावा पंच केदार (केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर) और पंच बदरी (बदरीनाथ, आदि बदरी, योग बदरी, ध्यान बदरी और भविष्य बदरी) की भी यात्रा कर चुके हैं।