आईटीबीपी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को दारमा घाटी से कराने का सुझाव देते हुए वैकल्पिक मार्ग की भी जानकारी विदेश मंत्रालय को दी थी। यदि उनके सुझाव पर विचार किया गया होता तो यात्रियों की फजीहत नहीं होती।बता दें कि आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने डेढ़ माह पहले टीम के साथ दारमा घाटी के वैकल्पिक रास्तों का निरीक्षण किया था। उन्होंने गुंजी से कुटी, ज्योलिंगकांग, शिमला पास, बेदांग, तिदांग, दुग्तु से दांतू, सौंग, मार्छासिपू होते हुए धारचूला से यात्रा कराने का सुझाव दिया था।
दारमा घाटी के पंचाचूली के बेस कैंप के नीचे से यह रास्ता है। उन्होंने कहा था कि मौसम और व्यास घाटी में रास्ते खराब होने की स्थित में वैकल्पिक मार्ग से यात्रा कराई जा सकती है। व्यास वैली की तरह ही दारमा घाटी में भी आईटीबीपी की बीओपी (बॉर्डर आउट पोस्ट) हैं। इस मार्ग से यात्रियों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती। यात्री तिदांग से धारचूला तक आसानी से वाहनों में आ-जा सकते हैं। शिमलापास की ऊंचाई लिपुलेख के ही बराबर होने से यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र के अनुरूप खुद को बनाए रखने में भी दिक्कत नहीं होती। डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने विदेश मंत्रालय के साथ ही उत्तराखंड सरकार को भी इस संबंध में पत्र लिखा था।
उत्कर्ष ने बीच में ही छोड़ी यात्रा
आठवें दल के कैलाश यात्री गाजियाबाद निवासी उत्कर्ष यादव ने यात्रा को बीच में ही छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि एयर लिफ्ट नहीं होने से यात्रा में विलंब हो गया है। वह एसआरएम यूनिवर्सिटी मोदीनगर में जॉब करते हैं। उनकी छुट्टी समाप्त होने वाली है। उन्होंने बताया कि वह गुंजी से पांचवें दल के वापस आने का इंतजार कर रहे हैं। यदि दल रविवार को नहीं पहुंच पाता है तो वह सोमवार को लौट जाएंगे। उन्होंने बताया कि शिव की नगरी कैलाश के दर्शन की प्रबल इच्छा थी, लेकिन अब यह संभव नहीं हो पा रहा है।