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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2018: 12वें दल की यात्रा स्थगित करने को विदेश मंत्रालय को लिखा पत्र

Sun, 22 Jul 2018 09:19 AM IST
दिनेश अवस्थी, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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kailash mansarovar yatra - फोटो : AmarUjala
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कैलाश मानसरोवर यात्रा में मौसम बाधक बन गया है। नजंग और लखनपुर में रास्ता ध्वस्त होने से यात्रियों को हेलीकॉप्टर से गुंजी पहुंचाने का निर्णय लिया गया। यात्रियों की राह को आसान करने के लिए वायुसेना के तीन हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए गए। बावजूद इसके, छियालेख और गर्ब्यांग में घने कोहरे ने हेलीकॉप्टरों की उड़ान को बाधित कर दिया है। इसके चलते कुमाऊं मंडल विकास निगम ने 12वें यात्री दल की यात्रा को फिलहाल स्थगित करने के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा।

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मानसरोवर यात्रा का पहला दल 13 जून को आधार शिविर धारचूला पहुंचा। दल ने तय समय पर यात्रा पूरी कर ली। इसके बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नजंग और लखनपुर में रास्ता पूरी तरह ध्वस्त हो गया। यात्रियों को हेलीकॉप्टर सुविधा मुहैया कराई गई। दूसरे, तीसरे और चौथे दल के यात्री भी आसानी से गुंजी पहुंच गए, लेकिन पांचवें दल के कुछ यात्रियों को पांच दिन तक पिथौरागढ़ में मौसम खुलने का इंतजार करना पड़ा। अब तक की यात्रा में सबसे अधिक मुसीबत पांचवें दल के यात्रियों ने ही झेली है। पांचवें दल के यात्री कैलाश की परिक्रमा पूरी कर पिछले सात दिन से गुंजी में फंसे हैं। छठा दल भी गुंजी में ही है।

सातवां दल कैलाश परिक्रमा पर है। 9वें दल के यात्रियों को आउट ऑफ रूट चौकोड़ी में रोका गया है। दसवां दल अल्मोड़ा में हैं। 11वें दल का शेड्यूल तय हो गया है। मौसम खराब होने और यात्रियों की उड़ान बाधित होने से अब केएमवीएन की भी चिंता बढ़ गई है। दो-तीन बैच के यात्रियों को ठहराने और भोजन की व्यवस्था करने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए निगम ने 12वें दल की यात्रा को फिलहाल स्थगित करने के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। 
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यदि मौसम ठीक होता तो कोई दिक्कत नहीं थी। उच्च हिमालयी क्षेत्र में घने कोहरे के चलते हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। यात्रियों को मार्ग  में किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए 12वें दल की यात्रा को फिलहाल स्थगित करने का अनुरोध किया गया है।
- टीएस मर्तोलिया, जीएम केएमवीएन
 

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आईटीबीपी ने दारमा घाटी से यात्रा कराने का दिया था सुझाव

ITBP Himveer
आईटीबीपी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को दारमा घाटी से कराने का सुझाव देते हुए वैकल्पिक मार्ग की भी जानकारी विदेश मंत्रालय को दी थी। यदि उनके सुझाव पर विचार किया गया होता तो यात्रियों की फजीहत नहीं होती।बता दें कि आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने डेढ़ माह पहले टीम के साथ दारमा घाटी के वैकल्पिक रास्तों का निरीक्षण किया था। उन्होंने गुंजी से कुटी, ज्योलिंगकांग, शिमला पास, बेदांग, तिदांग, दुग्तु से दांतू, सौंग, मार्छासिपू होते हुए धारचूला से यात्रा कराने का सुझाव दिया था।

दारमा घाटी के पंचाचूली के बेस कैंप के नीचे से यह रास्ता है। उन्होंने कहा था कि मौसम और व्यास घाटी में रास्ते खराब होने की स्थित में वैकल्पिक मार्ग से यात्रा कराई जा सकती है। व्यास वैली की तरह ही दारमा घाटी में भी आईटीबीपी की बीओपी (बॉर्डर आउट पोस्ट) हैं। इस मार्ग से यात्रियों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती। यात्री तिदांग से धारचूला तक आसानी से वाहनों में आ-जा सकते हैं। शिमलापास की ऊंचाई लिपुलेख के ही बराबर होने से यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र के अनुरूप खुद को बनाए रखने में भी दिक्कत नहीं होती। डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने विदेश मंत्रालय के साथ ही उत्तराखंड सरकार को भी इस संबंध में पत्र लिखा था।

उत्कर्ष ने बीच में ही छोड़ी यात्रा
आठवें दल के कैलाश यात्री गाजियाबाद निवासी उत्कर्ष यादव ने यात्रा को बीच में ही छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि एयर लिफ्ट नहीं होने से यात्रा में विलंब हो गया है। वह एसआरएम यूनिवर्सिटी मोदीनगर में जॉब करते हैं। उनकी छुट्टी समाप्त होने वाली है। उन्होंने बताया कि वह गुंजी से पांचवें दल के वापस आने का इंतजार कर रहे हैं। यदि दल रविवार को नहीं पहुंच पाता है तो वह सोमवार को लौट जाएंगे। उन्होंने बताया कि शिव की नगरी कैलाश के दर्शन की प्रबल इच्छा थी, लेकिन अब यह संभव नहीं हो पा रहा है।
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