कैलास मानसरोवर यात्रियों की राह में दुश्वारियां कम नहीं हैं। नाभीढांग से लिपुलेख के बीच इस बार भी पहले दो दलों को बर्फ से गुजरना पड़ेगा।
आईटीबीपी नाभीढांग से लिपुलेख तक आठ किलोमीटर के रास्ते में लाल झंडियां लगाने की तैयारी है। यात्री इन्हीं झंडियों के सहारे दुर्गम बर्फीली राह पार करेंगे। लमारी से मालपा, लखनपुर से मालपा, बूंदी से गुंजी के बीच ग्लेशियर खिसकने का खतरा बना है। फिलहाल इन्हें काटने का काम चल रहा है।
अस्कोट राज दरबार की पुरानी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी यात्रियों को देखने को मिलेगी। इस राजवंश के वर्तमान वारिस कुंवर भानुराज पाल इस बार भी आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय में यात्रियों के स्वागत के समय मौजूद रहेंगे।