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कैलास-मानसरोवर लैंडस्केप में है बेशकीमती विश्व धरोहरों की श्रृंखला

Thu, 24 Nov 2016 03:01 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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kailas mount
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कैलास-मानसरोवर लैंडस्केप में बेशकीमती विश्व धरोहरों की श्रृंखला है। इस भू परिक्षेत्र को एशिया का पहला ट्रांस बाउंड्री विश्व धरोहर बनाने के साथ ही कैलास पर्वत रूट के कई स्थानों को विश्व धरोहर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।
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ऐसी विश्व धरोहर श्रंखलाओं की सूची तैयार की जा रही है। कैलास मानसरोवर विश्व धरोहरों में सबसे अनूठा है। यूनेस्को ने भी इसकी ‘ग्लोबल वैल्यू’ को मान लिया है। स्कंद पुराण ने सहस्त्र वर्ष पहले और महाकवि कालीदास ने 600 ईसवी में कैलास-मानसरोवर भू क्षेत्र की महिमा का बखान किया था।

वर्ष 2015 में इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डवलपमेंट (ईसीमोड) इस परिक्षेत्र को ट्रांस बाउंड्री प्राकृतिक विश्व धरोहर घोषित करने का प्रस्ताव यूनेस्को को दिया। इसे विश्व धरोहर घोषित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके साथ ही कैलास-मानसरोवर पवित्र परिक्षेत्र में विश्व धरोहरों की श्रृंखला निकल आई है। अब इनकी सूची तैयार की जा रही है।
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श्रृंखला पर चार टीमों ने विचार किया मंथन

कैलाश मानसरोवर यात्रा - फोटो : फाइल फोटो
बुधवार को भारतीय वन्य जीव संस्थान स्थित यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज केटेगरी-2 सेंटर में इस श्रृंखला पर चार टीमों ने विचार मंथन किया। इसमें ‘सेक्रेड ग्रोव्ज’, उच्च हिमालयी दर्रे, प्राकृतिक स्थल, छिपला कोट, पार्वती ताल, चामुंडा, होकरा देवी समेत विश्व धरोहरों की श्रृंखला निकल आई।

विश्व धरोहर बनने के इनके दावे विश्व के अन्य स्थलों से अधिक मजबूत निकले। विश्व धरोहरों की इस श्रृंखला में विविधताएं हैं जो इसे अनूठा बनाती हैं। इसके बाद ईसीमोड ने इन श्रृंखलाओं को सूचीबद्ध करके इन्हें भी विश्व धरोहर घोषित करने के लिए यूनेस्को को प्रस्ताव देने की तैयारी शुरू कर दी है।

कैलास मानसरोवर इसलिए है अनूठा
कैलास-मानसरोवर परिक्षेत्र से पांच धर्म जुड़े हैं। यह महादेव शिव का क्षेत्र तो माना ही जाता है, साथ ही बौद्ध, बोनपो, जैन और सिख धर्म से जुड़ा है। यहां से सतलुज, सिंध, ब्रह्मपुत्र, करनाली नदियां निकलती हैं। यह भूटिया, वनराजी संस्कृति से जुड़ा है। दर्रों का सामाजिक, व्यापारिक और ऐतिहासिक महत्व है। इसकी रेंज में आठ देश आते हैं। यहां पर ऐसी वनस्पतियां हैं जो विश्व में कहीं नहीं पाई जातीं।

कैलास-मानसरोवर को बहुत पहले ही विश्व धरोहर घोषित होना चाहिए था। यहां विश्व धरोहरों की श्रृंखला है। यूनेस्को और अन्य देशों की अब नजर गई है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों का भी पता किया जा रहा है। अभी तीन स्थलों पर विचार हो रहा है।
- डॉ. राजन कोत्रू, रीजनल प्रोग्राम मैनेजर, ईसीमोड
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