शराब बेचने वाली महिलाओं के बारे जब जज को यह बात पता चली तो उन्होंने गैंगस्टर एक्ट लगने के बावजूद महिलाओं को सजा में रियायत दे दी। कोर्ट ने पक्ष सुनने के बाद तीनों महिलाओं को गैंगस्टर एक्ट में दोषी माना और सजा सुनाई। आगे पढ़िए कि ऐसा क्या हुआ कि जज ने महिलाओं की सजा को कम कर दिया
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कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में बुधवार को तीन महिलाओं को छह-छह माह कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। नई जाटव बस्ती ऋषिकेश निवासी माया पत्नी मुकेश, कृष्णा पत्नी राजे और छोटी पत्नी दीपक को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय देहरादून गुरुबख्श सिंह के कोर्ट में पेश किया गया।
पुलिस की ओर से बताया गया कि मई 2011 को जंगलात बैरियर के पास से 50-50 पव्वा ठेका देशी शराब सहित तीनों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं अन्य गवाहों ने भी आरोपियों के विरुद्ध अन्य मुकदमे पंजीकृत होने की जानकारी दी।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तीनों महिलाओं को गैंगस्टर एक्ट में दोषी माना और सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में महिलाओं को एक-एक माह की अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी।
नशे को बढ़ावा देने के लिए किया आतंकित
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कोतवाली ऋषिकेश के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश शाह ने उपरोक्त प्रकरण में तीनों महिलाओं के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था। महिलाओं पर आरोप था कि उन्होंने एक संगठित गिरोह बना रखा है जिसकी लीडर माया है और आर्थिक व भौतिक लाभ पाने के लिए लगातार बड़ी मात्रा में शराब लाकर ऋषिकेश क्षेत्र में ऊंचे दामों पर बेचती हैं।
बच्चों को देख मिली सजा में रियायत
तीनों महिलाओं को दोषी ठहराने के बाद सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने कोर्ट से गुजारिश की कि तीनों के छोटे, किशोर व नवयुवक बच्चे हैं। अगर उनको कारावास हो गई तो बच्चों की देखरेख के लिये कोई नहीं होगा। इस पर जज गुरुबख्श सिंह ने सज़ा पर रियायत बरतते हुए तीनों को सिर्फ 6-6 माह कारावास से ही दंडित किया।