‘अंखियों का है ये पानी बेजुबां, मेरा दर्द कह पाए ना। ओ साथी...ओ साथी... ओ साथी, तेरी चिट्ठी पतेरी आई ना’ गीत के जरिये दुनियाभर में छाये जुबिन नौटियाल इस गीत को अपना सबसे बड़ा अचीवमेंट मानते हैं। जुबिन उत्तराखंड की लोक संस्कृति को बॉलीवुड में स्थापित कर नई पहचान देना चाहते हैं। इसके अलावा उनकी भविष्य की कई अन्य योजनाएं हैं।
जुबिन ने बताया कि चिट्ठी गीत मैंने बचपन से सुना था। इस गीत का संगीत और बोल मुझे हमेशा लुभाता था। जब रैपर बादशाह को मैंने ये गीत सुनाया तो उन्होंने इसे साथ में गाने की ख्वाहिश जताई। मैंने गाने का मतलब उन्हें समझाया, जिसके बाद उन्होंने रैप तैयार किया। मैंने कहा कि मैं जौनसारी में ही गाऊंगा।
जब हमने एमटीवी में यह गीत गाया तो दुनिया के तमाम देशों से लोगों ने मुझसे सोशल मीडिया और मेल के जरिये गीत का मतलब पूछा। जबरदस्त रिस्पांस को देखते हुए मैंने यह गीत भूषण कुमार को सुनाया तो उन्हें भी पसंद आया।
फिर गीतकार कुमार ने इस गीत को एक अलग शेप दी। फिर मिडिल ईस्ट के कल्चर में उसे शूट किया। रिलीज के दो-तीन दिन में ही सैकड़ों लोगों ने इसका कवर तैयार कर लिया। फिलहाल चिट्ठी गीत का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। करीब दो सप्ताह में 18 मिलियन से ज्यादा लोग इस गीत को यूट्यूब पर देख और सुन चुके हैं।
बता दें कि जुबिन का परिवार देहरादून में ही रहता है। जुबिन इन दिनों देहरादून में अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। जुबिन अक्सर पहाड़ी संस्कृति को प्रमोट करते हुए नजर आते हैं। यहीं कारण है कि इतने कम समय में उनके प्रशंसकों की संख्या बहुत ज्यादा है।