चर्चित आईएफएस अफसर संजीव चतुर्वेदी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) लिखने की जिद पर अड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने जोर का झटका दिया है।
कैट की दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के एसीआर लिखने संबंधी आदेशों पर न केवल रोक लगाई है, बल्कि उनके और एम्स निदेशक के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए भी संजीव चतुर्वेदी को अनुमति दे दी है। इससे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मुश्किल में पड़ सकते हैं, क्योंकि अवमानना का आरोप सिद्ध होने पर सजा का प्रावधान भी है।
पूरे मामले की शुरुआत जेपी नड्डा के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनने के साथ हुई। नड्डा ने 9 नवंबर 2014 को स्वास्थ्य मंत्री का कार्यभार गृहण किया। इसके बाद दिसंबर-14 में उनके एम्स का अध्यक्ष बनने की अधिसूचना जारी हुई। अध्यक्ष बनने के बाद नड्डा ने मई-15 में संजीव की एसीआर लिखने का आदेश जारी कर दिया।
जेपी नड्डा को एसीआर लिखने में अयोग्य करार दिया था
sanjeev chaturvedi
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नियमानुसार कोई भी वरिष्ठ अधिकारी किसी भी अधीनस्थ अधिकारी की एसीआर तभी लिख सकता है, जब अधीनस्थ अधिकारी ने उसके साथ कम से कम 90 दिन लगातार काम किया हो। यह आदेश संजीव पर इसलिए लागू नहीं हुआ, क्योंकि उन्होंने इस 90 दिन की अवधि में 28 दिन का अवकाश लिया था।
नड्डा के आदेश के खिलाफ संजीव ने कैट में केस दायर किया था, जिसकी सुनवाई करते हुए कैट ने पिछले साल तीन फरवरी को 106 पन्ने के अपने निर्णय में जेपी नड्डा को संजीव की एसीआर लिखने में अयोग्य करार दिया था। कोर्ट का यह आदेश 90 दिनों के नियम पर आधारित था। इस आदेश के बाद एक साल तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय चुप्पी साधे रहा। इधर, बीती 21 जनवरी को फिर से नड्डा ने संजीव की उसी अवधि की एसीआर लिखने का आदेश जारी कर दिया, जिसे कैट पिछले साल रद कर चुका था।
इसके विरुद्ध संजीव ने कैट में नया केस दायर किया, जिसकी सुनवाई करते हुए 6 फरवरी को कैट ने इन आदेशों पर तत्काल रोक लगा दी। साथ ही कैबिनेट सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, जेपी नड्डा एवं एम्स निदेशक को नोटिस जारी करके चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। इस बार कैट ने संजीव को जेपी नड्डा, एम्स निदेशक और एम्स के उपनिदेशक के विरुद्ध पिछले तीन फरवरी 16 के आदेश की अवमानना का केस दायर करने की भी अनुमति दे दी है।
यह था पुराना विवाद
संजीव चतुर्वेदी
नड्डा और चतुर्वेदी के बीच विवाद तब शुरू हुआ था, जब नड्डा ने सांसद रहते हुए संजीव को सीवीओ के पद से हटाने के लिए चार पत्र लिखे थे।
इसमें यह भी मांग की गई थी कि संजीव के द्वारा भ्रष्टाचार को लेकर शुरू की गई सारी जांचों को तत्काल रोक दिया जाए। इन पत्रों पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर की। पीआईएल पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को इसकी तुरंत सुनवाई करने का आदेश दिया।
इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी-15 में नड्डा को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी करके उनका जवाब तलब किया था। फिलहाल मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही है।