प्री-फैब्रिकेटेड घरों में नहीं मिल सकेगी घरों जैसी सुविधा
आपदा प्रभावितों के लिए ढाक गांव में निर्मित किए जा रहे प्री-फैब्रिकेटेड घरों में पुराने घरों जैसा माहौल और सुविधाएं नहीं मिल सकेंगी। यहां न तो कीचन गार्डन की सुविधा मिल सकेगी और ना ही छत की। बच्चों को खेलने के लिए आंगन भी नहीं मिल सकेगा। कीचन में एक स्लैब रैक के अलावा कोई सुविधा नहीं मिलेगी।
सीबीआरआई के दिशा-निर्देशन में आरडब्ल्यूडी (ग्रामीण निर्माण विभाग) की ओर से ढाक गांव में एनटीपीसी की भूमि पर 15 और जोशीमठ टीपीसी तिराहे पर उद्यान विभाग की भूमि पर तीन प्री-फैब्रिकेटेड घरों का निर्माण किया जा रहा है। ढाक गांव में 48 वर्ग मीटर के दायरे में बन रहे प्री-फैब घर में दो कमरे, एक कीचन और बाथरूम अटैच होगा। कमरों में रैक की सुविधा नहीं है। रसोई में सामग्री रखने के लिए एक स्लैब रैक की व्यवस्था की जाएगी।
टाइल्सयुक्त बाथरूम में पानी और बिजली की लाइन दी जाएगी। सीमित भूमि होने के कारण बच्चों को खेलने के लिए आंगन की सुविधा नहीं दी जा सकेगी। घरों के आगे छोटी सी गैलरी की सुविधा मिलेगी। आरडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने बताया कि प्री-फैब्रिकेटेड घर टाइप टू साइज के सरकारी आवास की तरह निर्मित होंगे। कमरों और कीचन में आपदा प्रभावित अपने घरों की सामग्री को रखने के साथ ही अपनी सुविधानुसार रैक निर्मित कर सकेंगे।
क्या कहते हैं आपदा प्रभावित
आपदा प्रभावित दिंगबर बिष्ट, हरीश व दीपक रावत का कहना है कि उद्यान विभाग की भूमि पर मॉडल हट बनाए जा रहे हैं। जब ये हट बनकर तैयार हो जाएंगे तब प्रशासन की ओर से उन्हें हट दिखाए जाएंगे। इन घरों में सुविधाएं मिलने के बाद ही यहां निवास करने पर विचार किया जाएगा।