2009 में हुए सर्वे का भी नहीं हुआ खुलासा
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति एवं स्थानीय लोगों ने रक्षामंत्री, सेना के उच्च अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा गया है कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय जोशीमठ के काश्तकारों की सैकड़ों नाली भूमि सेना (रक्षा मंत्रालय) द्वारा बिना सहमति के अधिग्रहित की गई थी, जिसका लोगों को मुआवजा भी नहीं दिया गया। लोगों ने जब अपनी भूमि लौटने या फिर मुआवजा देने की मांग की, तो सेना द्वारा ली गई भूमि व अन्य अधिग्रहित भूमि का संयुक्त निरीक्षण तत्कालीन संयुक्त मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी जोशीमठ के निर्देश पर 26, 27, 28 व 29 अक्तूबर 2009 को किया जा चुका है, लेकिन उस सर्वे में क्या निकला इसका आजतक खुलासा नहीं हो पाया। तब ग्रामीणों से उनकी जमीन के दस्तावेज भी लिए गए थे। हालांकि मामले में चमोली जिलाधिकारी हिमांशु खुराना का कहना है कि इस प्रकार का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है और न ही शासन से इस संबंध में कुछ पूछा गया है।
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