13 अगस्त के बाद आई दरारें
सुनील वार्ड के पंवार मोहल्ले में रहने वाले भरत सिंह पंवार का कहना है कि उनके घर में पहले दरार नहीं आई थी। 13 अगस्त की बारिश के बाद यहां भू धंसाव शुरू हो गया है। रास्ता ध्वस्त हो गया, खेतों में दरार पड़ गई है। उनका मकान तो अभी सही है, लेकिन उनके आंगन तक दरार आ चुकी है। पूरे क्षेत्र में जगह-जगह भू धंसाव हो रहा है। इससे लोगों में भय बना हुआ है। उनका कहना है कि घर के दो कमरे अभी ठीक हैं, परिवार के लोग वहीं रह रहे हैं। लेकिन अधिक बारिश होने पर सभी होटल में बने राहत शिविर में चले जाते हैं।
बरसात ने हरे किए आपदा के जख्म
बरसात ने आपदा प्रभावित जोशीमठ वासियों के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। बरसात शुरू होने के बाद से ही अलग-अलग जगह पर गड्ढे होने, जमीन में दरार आने, घरों की दरार अधिक चौड़ी होने के मामले सामने आए हैं। मनोहर बाग वार्ड में औली रोड पर हाल ही में 22 मीटर लंबी ओर दो फीट गहरी दरा पड़ी। सिंहधार वार्ड में भी कई जगह पर रास्तों और खेतों में दरार आई है।
यह है जोशीमठ भूधंसाव की स्थिति
जोशीमठ भूधंसाव से 868 भवनों में दरारें आई थी, जिनमें से प्रशासन ने 181 भवनों को असुरक्षित की श्रेणी में रख दिया था। प्रशासन की ओर से 145 प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज के तहत 31 करोड़ रुपये मुआवजा वितरित कर दिया गया है। नगर पालिका जोशीमठ के अंतर्गत अभी भी 57 परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं। जबकि 239 परिवार अपने रिश्तेदारों या किराए के घरों में रह रहे हैं।
सुनील वार्ड में कुछ जगहों पर भूधंसाव हुआ है। यहां प्रभावित परिवारों को राहत शिविर में जाने के लिए कहा गया है। क्षेत्र में अन्य जगहों पर स्थिति सामान्य है। लोगों से विस्थापन के लिए विकल्प मांगे गए हैं। अभी तक किसी की ओर से भी लिखित रुप में विकल्प नहीं दिए हैं। मानसून सीजन के बाद फिर से लोगों से विस्थापन को लेकर विकल्प मांगे जाएंगे।
- हिमांशु खुराना, डीएम, चमोली
अधिकारिक रूप से हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है। जमीन के भीतर मिट्टी के सेटलमेंट के चलते भीतर रूका हुआ पानी कहीं न कहीं अपना रास्ता बना लेता है। जमीन के भीतर पानी बहने की आवाज के पीछे इस तरह के कारण हो सकते हैं। इस बारे में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- डॉ. गोपाल कृष्ण, वैज्ञानिक राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की
जमीन के भीतर पानी का अपना एक चैनल काम करता है। जोशीमठ के मामले में पूर्व में हुए अध्ययनों में यह बात सामने आ चुकी है, वहां भी पानी का चैनल काम कर रहा है। बरसात में इसमें वृद्धि हो सकती है। बाकि मौके की क्या स्थिति है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
- डॉ. कालाचंद साईं, निदेशक, वाडिया भू विज्ञान संस्थान