पहाड़ों में सुरंग बनने से धंस रहा जोशीमठ : शिवानंद
गंगा की अविरलता और बड़ी बांधों के खिलाफ आवाज उठाने वाले मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि पहाड़ों के नीचे से बनाई जा रही सुरंगों से जोशीमठ धंस रहा है। इन परियोजनाओं को बंद करने की मांग पूर्व प्रोफेसर ब्रह्मलीन ज्ञानस्वरूप सानंद ने उठाई थी। उन्होंने कहा कि मातृ सदन और उनकी मांग नहीं मानने पर आज लोगों को यह दिन देखना पड़ रहा है।
शुक्रवार को प्रेस को जारी बयान में परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि मातृ सदन इस बात को कई वर्षों से उठा रहा है, पूर्व प्रोफेसर ज्ञानस्वरूप सानंद जैसे वैज्ञानिक ने भी पहाड़ों पर बन रही परियोजनाओं को बंद करने की मांग की थी। इसमें एक तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना भी थी। पर उनकी मांग नहीं मानी गई। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के 194 दिन के अनशन के दौरान प्रधानमंत्री की ओर से पत्र भेजकर वादा किया गया था कि आपकी मांगी पूरी की जाएंगी, पर उसको पूरा नहीं किया गया। इसके बाद साध्वी पद्मावती ने अनशन किया। वह संघर्ष करतीं-करतीं व्हीलचेयर पर आ गई हैं। यदि उसी वक्त इस परियोजना को बंद कर दिया गया होता तो आज ऐसे हालात पैदा नहीं होते।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से जोशीमठ के लोग उग्र होकर आज रोड पर निकल आए हैं, यदि वह पहले आ जाते तो उन्हें शायद जोशीमठ न धंसता। उन्होंने कहा कि गलत रिपोर्ट के आधार पर सुरंग और परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि यदि जोशीमठ को बचाना है तो निर्माणाधीन परियोजना रोक दें और निर्मित बांध को खत्म कर दें। उत्तराखंड को दैवी आपदाओं से बचाना है तो लोग और सरकार मातृ सदन के मत को माने।