प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जोशीमठ भू-धंसाव प्रकरण में उत्तराखंड सरकार को शीघ्र पुनर्वास नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को पीएमओ में बैठक हुई, जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से तकनीकी संस्थाओं की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया।
ये भी पढ़ें... Joshimath: भू-धंसाव से सर्वाधिक प्रभावित चार वार्डों से 181 घर हुए खाली, गायब हुई रौनक...पसरा सन्नाटा
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनडीएमए की सदस्य सचिव ने अब तक की प्रगति से अवगत कराया। सूत्रों के मुताबिक, एनडीएमए की ओर से बताया गया कि जोशीमठ को हाई, मीडियम और लो रिस्क एरिया में बांटा गया है। इसी के अनुरूप आगे की रणनीति बनाई जा रही है। आठ वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थाओं की प्रारंभिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इस रिपोर्ट काे कंपाइल किया जा रहा है। शीघ्र गृह मंत्रालय के अनुमोदन के बाद इसे उत्तराखंड सरकार को सौंप दिया जाएगा।
बैठक में उत्तराखंड के मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु की ओर से राज्य सरकार की ओर से अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी साझा की गई। इसके अलावा अस्थायी रूप से विस्थापित परिवारों और उनके लिए जुटाई गई सुविधाओं के बारे में भी अवगत कराया गया। क्षतिग्रस्त भवनों की रिपोर्ट साझा करने के साथ ही नई दरारों के विषय में भी बताया गया।
सूत्रों के अनुसार बैठक में पीएमओ की ओर से जोशीमठ के पुनर्निर्माण और विस्थापन संबंधी नीति को शीघ्र तैयार करने पर जोर दिया गया गया। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार आगामी 15 फरवरी को होने वाली कैबिनेट की बैठक में जोशीमठ के पुनर्वास, विस्थापन और पुनर्निर्माण नीति को ला सकती है। संभव है कि इससे पहले एनडीएमए अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगा। बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, अपर सचिव सविन बंसल आदि मौजूद रहे।