वहीं, पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए पांच सौ हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना होगा। पंतनगर एयरपोर्ट के आसपास सरकार के पास सरकारी और वन भूमि उपलब्ध है। बता दें कि वर्तमान में दोनों एयरपोर्ट को इंडियन एयरपोर्ट अथॉरिटी संचालित कर रही है। विस्तारीकरण से जौलीग्रांट और पंतनगर से वियतनाम, कंबोडिया, दुंबई समेत गल्फ कंट्री के लिए हवाई सेवाएं शुरू होगी।
उड़ान योजना के तहत प्रदेश में 12 हेलीपेड का निर्माण किया गया। ये हेलीपेड लैंडिंग के लिए तैयार है, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट खिड़की, वेटिंग रूम, चेकिंग प्वाइंट, सामान रखने समेत अन्य सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके लिए पवन हंस एविएशन कंपनी ने आठ हेलीपेड की डीपीआर शासन को सौंपी है। यात्री सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद इन हेलीपेड से नियमित हेली सेवाएं संचालित की जा सकेगी।
जौलीग्रांट और पंतनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित करने के लिए भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा। तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। दोनों एयरपोर्ट के लिए किस तरह से भूमि का अधिग्रहण किया जा सकता है।
- दिलीप जावलकर, सचिव, नागरिक उड्डयन विभाग