गांवों में चलने वाली टैक्सियों और प्राइवेट बसों से अब जिला पंचायत भी टैक्स वसूलेगी। पंचायत ने प्राइवेट टैक्सियों और प्राइवेट बसों पर वार्षिक कर लगाने का निर्णय लिया है। इससे पंचायत की तो आमदनी होगी, लेकिन रोडवेज बसों की सुविधा से वंचित गांवों के लोगों पर किराये का बोझ बढ़ जाएगा।
जिला पंचायत के अनुसार टैक्स की दर 1200 रुपये से 2000 रुपये सालाना तक है। टैक्स नहीं देने वाले वाहन चालकों पर वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) की कार्रवाई की जाएगी। चंपावत जिले की कुल 2.65 लाख की आबादी में से 1.90 लाख लोग 313 ग्राम पंचायतों में रहते हैं।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 239 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन कारोबार करने वाले वाहनों से व्यावसायिक लाइसेंस के रूप में कर वसूलने का निर्णय लिया गया है। वार्षिक आधार पर यह कर वसूला जाएगा। इससे जिला पंचायत को 19.15 लाख रुपये वार्षिक आय होने का अनुमान है। जिला पंचायत ने ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले सभी निजी वाहनों से पंजीकरण कराने के आदेश दिए हैं।
एआरटीओ रश्मि भट्ट ने बताया कि चंपावत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 1433 टैक्सियां और मैक्सियां तथा 128 मिनी बस और अन्य तरह की बसें हैं।
लाइसेंस की ये हैं सालाना दर:
प्राइवेट टैक्सी/मैक्सी: 1200 रुपये
प्राइवेट मिनी बस: 1500 रुपये
प्राइवेट बस: 2000 रुपये
ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले प्राइवेट वाहनों को एक माह के भीतर व्यावसायिक लाइसेंस लेना जरूरी है। लाइसेंस की रकम जमा नहीं होने पर नोटिस जारी कर 25 प्रतिशत सरचार्ज वसूला जाएगा। अगर जरूरत पड़ी, तो आरसी भी काटी जाएगी।
- राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत