सर्राफा व्यापारियों की हड़ताल से शहर में ही प्रतिदिन लगभग 20 लाख का कारोबार प्रभावित हो रहा है। शनिवार को भी मेन बाजार में एकत्रित हुए सर्राफा व्यापारियों ने शहर में घूम घूमकर दुकानों को बंद कराया। इस दौरान सिविल लाइंस में एक दुकानदार से सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों की नोकझोंक भी हुई।
सर्राफा एसोसिएशन के आह्वान पर लगातार चौथे दिन व्यापारियों ने दुकान बंद रखी। इक्का-दुक्का खुली दुकानों को भी सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जबरन बंद करा दिया। सिविल लाइंस में सर्राफा की एक खुली दुकान को बंद कराने में एसोसिएशन पदाधिकारियों से काफी नोकझोंक भी हुई। इससे पहले दुकानदार ने दुकान बंद करने से इनकार कर दिया।
सर्राफा के 150 से अधिक कारोबारी
इस पर सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारी और अन्य व्यापारी वहीं धरने पर बैठ गए। तब जाकर दुकान बंद हो सकी। एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि एक फीसदी उत्पादन शुल्क बढ़ाने और दो लाख से अधिक के ट्रांजेक्शन पर पैन कार्ड की अनिवार्यता से सर्राफा व्यापारियों के साथ ही आमजन की भी मुश्किलें बढ़ेंगी, इसीलिए इसका विरोध किया जा रहा है।
उन्होंने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान किया। दूसरी ओर पालकी ज्वैलर्स के स्वामी दिनेश सहदेव का कहना है कि हड़ताल से प्रतिदिन शहर में लगभग 15 से 20 लाख का कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि शहर में 150 से अधिक सर्राफा कारोबारी हैं। विरोध प्रदर्शन करने वालों में विजय चौहान, विनोद सोनी, नीरज गुप्ता, पवन सहदेव, राजेंद्र कर्णवाल आदि शामिल थे।