कोरोना संक्रमण के चलते जेईई (जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन) मेन्स-वन के एक महीने के लिए टलने की संभावना से देहरादून के छात्र खुश नजर आ रहे हैं। जेईई मेन्स-वन की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि लॉकडाउन के बाद से कोचिंग संस्थान बंद हैं। घर पर ही तैयारी करनी पड़ रही है। अगर एक महीने का अतिरिक्त समय मिला तो सही से तैयारी की जा सकेगी।
लॉकडाउन लागू होने के बाद से देहरादून समेत प्रदेशभर के कोचिंग संस्थान बंद चल रहे हैं। जेईई मेन्स के लिए हजारों छात्र कोचिंग पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में इन छात्रों को घर पर ही खुद तैयारी करनी पड़ रही है। पाठ्यक्रम भी काफी अधिक है, जिसे जनवरी तक पूरा करना भी छात्रों के लिए चुनौती साबित हो रहा था।
इसका तनाव भी साफ देखने को मिल रहा था। लेकिन, अब जेईई मेन्स-वन जनवरी के बजाय एक महीने की देरी से फरवरी में आयोजित होने की संभावना है। इससे छात्र राहत महसूस कर रहे हैं।
प्रदेशभर में 15 हजार छात्र देते हैं परीक्षा
बात देहरादून की करें तो यहां से जेईई मेन्स की परीक्षा में 3 से 4 हजार छात्र आवेदन करते हैं। जबकि, प्रदेशभर में यह आंकड़ा करीब 15 हजार से ज्यादा का रहता है।
जेईई मेन्स-वन इसलिए है खास
दरअसल, जेईई मेन्स-वन पहली बार परीक्षा दे रहे छात्रों के लिए खास मायने रखती है, क्योंकि किसी भी छात्र को जेईई मेन्स की परीक्षा देने के साल में दो मौके मिलते हैं। पहली परीक्षा जेईई मेन्स-वन जनवरी में होती है, जबकि दूसरी जेईई मेन्स-2 अप्रैल से मई के बीच में होती है।
छात्र जेईई मेन्स-वन में अपने प्रदर्शन के आधार पर खुद की कमियों व स्वमूल्यांकन कर पाता है और फिर जेईई मेन्स-2 के लिए खुद को अच्छे से तैयार कर सकता है। दोनों परीक्षा में से सर्वश्रेष्ठ स्कोर के आधार पर जेईई एडवांस के लिए चुने जाते हैं। जेईई एडवांस के स्कोर के आधार पर देश के इंजीनियरिंग कॉलेज आवंटित होते हैं।
मैं जेईई मेन्स-वन के लिए कई महीने से तैयारी कर रहा हूं। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते तैयारियों पर बुरा असर पड़ा है। सिलेबस बहुत ज्यादा है। पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा था। एक महीना अतिरिक्त समय मिलने से अब थोड़ी राहत मिलेगी।
-अविनाश मल्होत्रा, छात्र, डालनवाला
कोविड-19 के कारण जेईई मेन्स-वन एक महीने की देरी से फरवरी में आयोजित होने की जानकारी मिली है। इससे बेहद खुश हूं। कोचिंग संस्थान बंद होने से तैयारी सही से नहीं हो सकी। अब एक महीना और मिलने की संभावना है।
- अंकित काला, छात्र, मोथरोवाला
कोरोना के कारण इस साल बच्चों की तैयारी पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है। ज्यादातर बच्चों ने सितंबर-अक्टूबर से तैयारी शुरू की है, जिसमें जनवरी तक सिलेबस खत्म कर पाना भी बेहद मुश्किल है। फरवरी में परीक्षा होने से बच्चों को तैयारी के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मिल जाएगा। इसमें कोर्स पूरा करने के साथ ही रिवीजन भी किया जा सकता है।
-विपिन बलूनी, एमडी, बलूनी क्लासेस
आमतौर पर बच्चे अप्रैल-मई से ही जेईई मेंस की तैयारी में जुट जाते हैं। इस साल कोरोना के कारण बच्चे घर पर रहकर ही पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे तैयारियों पर असर पड़ना स्वाभाविक है। सरकार ने फरवरी में परीक्षा कराने का निर्णय लेकर अच्छा किया है। अब सुरक्षा गाइडलाइन के साथ कोचिंग सेंटर भी खोल दिए जाने चाहिए ताकि बच्चों की तैयारी और बेहतर हो सके।
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डीके मिश्रा, चेयरमैन, अविरल क्लासेस