भले ही जनाक्रोश भाजपा सरकार के खिलाफ था, लेकिन कांग्रेस की गुटबाजी फलक पर छा गई।
रैली शुरू होते वक्त पूर्व सीएम हरीश रावत के कहने पर भी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को बोलने के लिए माइक नहीं दिया गया। इस पर कांग्रेसी आपस में भिड़ गए और धक्कामुक्की शुरू हो गई। किसी तरह बीच बचाव हुआ, इसके बाद अलग-अलग गुटों में बंटकर नगर निगम से तहसील पहुंचे बड़े नेताओं ने तल्खी को सरेआम कर दिया। इतना ही नहीं, पूर्व सीएम और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बीच में ही रैली को छोड़कर दिल्ली चले गए।
जनाक्रोश रैली के दौरान सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे नगर निगम में एकत्र कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार जिन वादों के साथ सत्ता में आई थी, आज वह पूरी तरह गायब है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने कहा कि उत्तरा प्रकरण से साबित हो रहा है कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सम्मान को लेकर कितनी गंभीर है। भगवानपुर विधायक ममता राकेश ने कहा कि भाजपा सरकार भष्ट्राचार में संलिप्त है। विकास का मुद्दा कहीं से कहीं तक भी धरातल पर नजर नहीं आ रहा है।
इसी बीच पूर्व सीएम हरीश रावत ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को बोलने के लिए माइक देने की बात कही। लेकिन किशोर को माइक नहीं दिया गया। इसी बीच कुछ कार्यकर्ता माइक देने के लिए शोर मचाने लगे। इसे लेकर मामला खींचातानी पर आ गया। पूर्व चेयरमैन दिनेश कौशिक तथा कांग्रेस आईटी विभाग के प्रदेश महासचिव आशीष सैनी के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। मंच से हरीश रावत हाथ से इशारा करते हुए शांत रहने की अपील करते रहे और मौके पर धक्कामुक्की और खींचतान शुरू हो गई। तभी पूर्व राज्यमंत्री संजय पालीवाल ने भी बीच में आकर बोलना शुरू कर दिया और दोनों को अलग कराया। मौके पर अजीब सी स्थिति हो गई। खुद किशोर उपाध्याय भी असहज महसूस करने लगे। इसके बाद किशोर उपाध्याय बिना बोले ही मंच से उतरकर बाहर की ओर चले गए।
यही नहीं इसके बाद यहां से रैली के रूप में प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश तथा हरीश रावत और किशोर उपाध्याय अलग-अगल गुटों में बंटकर आगे पीछे तहसील की ओर बढ़े। तहसील में आयोजित कार्यक्रम में प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश के साथ किशोर उपाध्याय तो पहुंच गए। लेकिन थकान से चूर हरीश रावत तहसील के बाहर हाईवे पर ही खड़े हो गए। उन्होंने कुछ ठंडा पीने की इच्छा जताई। जिस पर हाईवे किनारे खड़ी एक स्कूटी पर उन्हें बैठाकर जूस पिलाया गया। तभी हरीश रावत ने किशोर उपाध्याय को बाहर बुलाने को कहा। किशोर उपाध्याय के बाहर आने पर दोनों गाड़ी में बैठकर दिल्ली मीटिंग में जाने की बात कहकर निकल गए।
इस दौरान किसान आयोग के अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह, विधायक फुरकान अहमद, विधायक काजी निजामुद्दीन, पूर्व मेयर यशपाल सिंह राणा, पूर्व मंत्री संजय पॉलीवाल, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी, लिब्बरहेड़ी गन्ना विकास परिषद के अध्यक्ष अशोक चौधरी, रश्मि चौधरी, जिला पंचायत सदस्य किरत सिंह, पूर्व चेयरमैन दिनेश कौशिक, नगर अध्यक्ष कलीम खान, पूर्व मंडी समिति अध्यक्ष प्रमोद जौहर, अशीष सैनी आदि लोग मौजूद रहे।
पुलिस ने किए थे भारी बदोबस्त
पुलिस प्रशासन ने भाजपा की जन आक्रोश रैली को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए भारी बंदोबस्त किए थे। बृहस्पतिवार की सुबह ही दो कंपनी पीएसी, 30 एसआई, 60 कांस्टेबल, 20 महिला कांस्टेबल, दंगा नियंत्रण वाहन और फायर टेंडर सिविल लाइंस कोतवाली में पहुंच गए थे। पुलिसबल रैली के साथ-साथ चलता रहा। इन सबके साथ ही स्थानीय पुलिस बल भी व्यवस्था को संभालता रहा। इसके चलते रैली शांतिपूर्वक संपन्न हो गई।
दिल्ली- हरिद्वार हाईवे पर लगा जाम
जन आक्रोश रैली के दौरान जैसे ही कार्यकर्ताओं का हुजूम दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर पहुंचा, तो हाईवे पर वाहनों का जाम लग गया। इसके साथ ही तहसील के बाहर वाहनों की पार्किंग की वजह से भी और जाम लग गया। जन आक्रोश रैली के सामप्त हो जाने के बाद भी पुलिसकर्मियों को जाम खुलवाने में घंटों लग गया। इसके कारण राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी।
प्रधानमंत्री का पुतला फूंका दहन
रैली के साथ-साथ कार्यकर्ताओं ने नगर निगम से लेकर तहसील के गेट तक प्रधानमंत्री के पुतले की शव यात्रा निकाली। बाद में पुतले को तहसील के गेट पर जाकर आग के हवाले कर दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।