वहीं, लोक अभियोजक और वादी के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से वादी को बुलाकर उसके साथ मारपीट की और जबरन कार में डालकर भी पीटा। वादी के अधिवक्ता ने बचाव पक्ष की ओर से पेश चैट के स्क्रीनशॉट की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए।
अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए पाया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 117(2), 191(2), 351(3), 140(1) और 3(5) के तहत आरोप हैं। न्यायालय ने कहा कि विवेचना अभी प्रारंभिक स्तर पर है और इस चरण में साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण उचित नहीं होगा। अपराधों की गंभीरता और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने चारों आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी।