15 अगस्त : राखी बंधवाकर सूरज आईटीबीपी की भर्ती के लिए लालकुआं पहुंचा। रात साथियों के साथ कमरा लेकर रुका।
16 अगस्त : आईटीबीपी में जीडी भर्ती की दौड़ में शामिल हुआ। दोपहर लगभग एक बजे उसकी आईटीबीपी के कर्मियों से कहासुनी हुई। इसके बाद वह लापता हो गया।
17 अगस्त : सूरज के परिजन और साथियों ने पुलिस और आईटीबीपी के अधिकारियों से मुलाकात कर जानकारी ली।
18 अगस्त : पुराना आईटीबीपी परिसर से सूरज का सड़ा गला शव झाड़ियों से बरामद हुआ। लोगों ने हंगामा किया। पुलिस ने आईटीबीपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
19 अगस्त : सूरज का पोस्टमार्टम हुआ। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार।
21 अगस्त : पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाकर घटनास्थल के आसपास से फावड़ा और सूरज के जूते मौजे और राखी बरामद की।
23 अगस्त : लोगों ने आईटीबीपी के मेन गेट पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया।
26 अगस्त : पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा कर आईटीबीपी के तीन कर्मियों को गिरफ्तार किया।
सूरज हत्याकांड को लेकर दिनभर प्रदर्शन होता रहा। शाम को अपर पुलिस अधीक्षक, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, कोतवाल योगेश उपाध्याय और नानकमत्ता के विधायक प्रेम सिंह राणा ने गिरफ्तारी की जानकारी दी, तब जाकर उन्होंने धरना खत्म किया। सोमवार को भी दर्जनों लोग आईटीबीपी गेट के सामने धरने पर बैठे रहे।
नानकमत्ता विधायक प्रेमसिंह राणा ने बताया कि आईटीबीपी के तीन कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है, मगर लोग नहीं माने। बाद में विधायक ने अपर पुलिस अधीक्षक अमित श्रीवास्तव और सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को मौके पर बुला लिया। दोनों अधिकारियों ने भी लोगों को समझाया। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल ने भी प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। बाद में धरना खत्म कर दिया गया।
पोस्टमार्टम से पता चला कि घटना के दिन भर्ती के लिए आए सूरज सक्सेना ने सुबह से खाना नहीं खाया था। दौड़ के बाद बहस करने पर आईटीबीपी अधिकारियों के सामने अधीनस्थों ने लात-घूंसों और डंडे से पीटकर अपना गुस्सा उतारा। अंत में उसने दम तोड़ दिया लेकिन, आईटीबीपी भर्ती में आए लोगों ने उसकी खबर नहीं ली।
सिस्टम की लापरवाही के चलते युवक का शव झाड़ियों के बीच सड़ गया। पुलिस टीम ने जांच के दौरान सूरज सक्सेना के साथियों से पूछताछ की। साथियों ने पुलिस को बताया था कि 16 अगस्त को दौड़ के बाद हांफते हुए सूरज सक्सेना ने अपना टैग आईटीबीपी के कर्मचारियों से लेने को कहा था। इसी बात को लेकर सूरज और आईटीबीपी अधिकारियों के बीच बहस हो गई थी।
बताया कि बहस करने से गुस्साए अधीनस्थों ने सूरज पर हमला बोल दिया। लात घूंसे और डंडे के वार से सूरज पस्त हो गया। उसके कान के पास से खून निकल आया था। इसके बाद वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया। वह झाड़ियों तक कैसे पहुंचा, इस बारे में साथी और आईटीबीपी के कर्मचारियों ने पुलिस को कुछ नहीं बताया।
18 अगस्त को परिजनों ने इस मामले में पुलिस से संपर्क किया। मुकदमा दर्ज होने के बाद सूरज की खोजबीन शुरू हो गई। शव आईटीबीपी के पुराने परिसर स्थित झाड़ियों में पाया गया। शव पर कीड़े पड़ गए थे। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम के दौरान छह घाव चिन्हित किए गए। पोस्टमार्टम के दौरान ब्रेन का हिस्सा गल गया था। डाक्टरों ने काफी प्रयास किया। बाद में डाक्टरों ने विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए पुलिस को सुपुर्द किया।
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत तीस अगस्त को नानकमत्ता आ रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि वह इस मामले में परिजनों से बात करेंगे। उधर, उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष अमिता लोहनी ने कहा कि पुलिस सही दिशा में काम कर रही है। न्याय मिलने तक वह उनके साथ हैं।
मंदिर के सामने मिले जूते
दोस्तों को आईटीबीपी मंदिर के ठीक सामने सड़क के किनारे सूरज के जूते मिले। इससे पूर्व आईटीबीपी परिसर में कांबिंग के दौरान पुलिस को रुमाल, मोजे और राखियां मिलीं थीं।
बता दें कि, बीती 18 अगस्त को आईटीबीपी में भर्ती होने के लिए हल्दूचौड़ गउ नानकमत्ता के छात्र का शव संदिग्ध हालात में आईटीबीपी परिसर की झाड़ियों में मिला था। शव में कीड़े पड़ गए थे।
परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए नानकमत्ता थाने और हल्दूचौड़ में घंटों हंगामा किया। इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। वार्ड नंबर सात अनाज मंडी नानकमत्ता निवासी ओमप्रकाश सक्सेना का बेटा सूरज सक्सेना (24) श्री गुरुनानक देव पीजी कॉलेज नानकमत्ता में एमए प्रथम वर्ष का छात्र था।
सूरज 15 अगस्त की शाम को घर से 34वीं वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल कैंप हल्दूचौड़ में भर्ती होने के लिए अपने साथियों के साथ गया था। बताया जा रहा है कि 16 अगस्त को सूरज दौड़ में वह सफल हो गया था। आरोप है कि दौड़ के बाद टोकन जमा करने को लेकर उसका आईटीबीपी भर्ती के कुछ अधिकारियों के साथ विवाद हो गया था। विवाद के बाद से ही वह अचानक लापता हो गया।