पार्षद स्वच्छता समितियों के कर्मचारियों की जांच बैठी तो अब कई पार्षद कर्मचारियों के नाम जुड़वाने के लिए निगम के चक्कर काट रहे हैं।
विदित है कि पार्षद स्वच्छता समिति में कर्मचारियों को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। निगम में स्वच्छता समितियों के माध्यम से जो कर्मचारी रखे गए, उनमें से कई कर्मचारी मौके से गायब मिले। जबकि एक ही नाम-पते के कर्मचारी भी कई वार्डों में पाए गए।
अधिकतर पार्षदों ने तो बोर्ड कार्यकाल खत्म होने पर कर्मचारियों को बदलकर निगम में उनके नाम-पते भी अपडेट करवा दिए थे। लेकिन कुछ पार्षद ऐसे हैं, जो यह काम नहीं कर पाए। ऐसे में अब जब प्रशासक और डीएम ने इस मामले में जांच बैठाई तो अब कई पार्षद रोज कर्मचारियों के नाम जुड़ाने के लिए निगम के चक्कर काट रहे हैं।
उनका कहना है कि उन्होंने नवंबर से पहले ही कर्मचारियों के नाम-पते सुपरवाइजर और निगम को दे दिए थे, लेकिन उन्होंने सूची अपडेट नहीं की। जबकि सूत्रों की माने तो पार्षद अब इसलिए कर्मचारियों के नाम जुड़वाने चाहते हैं ताकि उन पर कोई आंच नहीं आए। हालांकि निगम अधिकारियों ने साफ किया है कि जो कर्मचारी मौके पर मिलेगा, उसे ही कर्मचारी मानकर वेतन दिया जाएगा। अब किसी भी नए कर्मचारी का नाम सूची में नहीं जोड़ा जाएगा।
Iस्वच्छता समितियों के कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही प्रशासक व जिलाधिकारी ने मामले में सीडीओ की अध्यक्षता में जांच बिठाई है। जो कर्मचारी मौके पर मिलेगा, उसी को वेतन दिया जाएगा। अब किसी भी नए कर्मचारी का नाम नहीं जोड़ा जाएगा। - गौरव कुमार,नगर आयुक्तI