सर जॉर्ज एवरेस्ट-हाथीपांव क्षेत्र में ग्रामीणों के आवागमन के अधिकार (राइट ऑफ वे), भूमि सीमांकन, पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा नेता परिषद रविंद्र जुगरान ने इस संबंध में पर्यटन सचिव को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में रविन्द्र जुगरान ने कहा कि सर जॉर्ज एवरेस्ट, हाथीपांव क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों के संवैधानिक अधिकारों के साथ ही पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े गंभीर विषय सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले की शासन स्तर से जांच कराकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों के अधिकारों और क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता दोनों का संरक्षण हो सके।
पत्र में ग्रामीणों के हवाले से कहा गया है कि वे पीढ़ियों से एक पारंपरिक मार्ग का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। यह मार्ग मसूरी, बुलाट छसखेत, मिसासपट्टी और विनोग बर्ड सेंचुरी क्षेत्र को जोड़ता है। वर्तमान में इस मार्ग पर अवरोध लगाए जाने के साथ ही प्रवेश के लिए शुल्क लिए जाने की स्थिति सामने आ रही है। जुगरान ने मांग की कि राजस्व अभिलेखों और पंजीकृत दस्तावेजों में यदि इस मार्ग का राइट ऑफ वे दर्ज है तो उसके संरक्षण के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। भाजपा नेता ने पत्र में सर जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र के समीप हेलिपैड के निर्माण एवं संचालन को लेकर भी पर्यावरणीय प्रभावों की जांच की मांग की है। पत्र में वर्ष 2023 में किए गए भूमि सीमांकन को लेकर स्थानीय लोगों की आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। जुगरान ने मांग की कि यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो पूरे मामले का निष्पक्ष परीक्षण कराकर आवश्यकतानुसार पारदर्शी तरीके से पुनः सीमांकन कराया जाए।