रुड़की के नेत्रहीन इस्लाम चाचा दुनिया को नेकी की राह दिखा रहे हैं। लोकल ट्रेनों में मूंगफली और नमकीन बेचकर मुश्किल से गुजर बसर करने वाले इस्लाम ने 42 हजार रुपयों से अपने गांव के लोगों के लिए एक समरसेबिल लगवाया है।
इस काम में उनकी दशकों की बचत खर्च हो गई पर उन्हें खुशी है कि उनके प्रयास से लोग आसानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। इतना ही नहीं उनके मोहल्ले के करीब 25 घरों के लोगों ने पाइप डाल कनेक्शन भी ले लिया है। इसमें खर्च होने वाली बिजली का बिल भी इस्लाम ही चुकाते हैं।
गांव में पेयजल की बेहतर सुविधा के लिए इस्लाम ने तीन माह पहले एक समसेबिल पंप लगवाया है। इस पंप को लगाने में 42 हजार रुपए का खर्च आया। करीब छह हजार की आबादी वाले खाताखेड़ी गांव के प्रधान एजाज ने बताया कि इस्लाम की इस नेकी के कारण पूरा गांव उसको बेहद प्यार करता है।
अब गांववालों ने तय किया है कि इस समरसेबिल पर आने वाले बिजली के खर्च को वे लोग आपस में बांट कर चुकाएंगे।